श्रीलंका में स्कूल डवलपमेंट आफिसर्स का प्रदर्शन

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4 दिसंबर को श्रीलंका के शिक्षा मंत्रालय के सामने करीब 500 स्कूल डवलपमेंट आफिसर्स ने प्रदर्शन किया। इनकी मांग इनको स्थायी किये जाने की है। स्कूल डवलपमेंट आफिसर्स के इस प्रदर्शन पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और 4 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। बाद में जब उन्हें मज़िस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो उन्हें 10 दिसंबर तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
    
ज्ञात हो कि श्रीलंका में राजपक्षे की सरकार के समय 2021 में 16,000 स्नातकों को स्कूल डवलपमेंट आफिसर्स के रूप में स्कूलों में भर्ती किया गया था। तब से ये अध्यापकों के रूप में स्कूल में पढ़ा रहे हैं। इन्हें मात्र 6500 रुपये मिलते हैं जो इन्हीं के समान स्कूल में पढ़ा रहे स्थायी अध्यापकों से काफी कम हैं। स्कूल डवलपमेंट आफिसर्स की मांग स्थायी करने को लेकर है ताकि इनका वेतन बढ़ सके। 
    
स्कूल डवलपमेंट आफिसर्स की तरह ही 2020 में 50,000 स्नातकों की भर्ती की गयी थी। बाद में जनवरी 2022 में इनको इकोनामिक डवलपमेंट आफिसर्स के रूप में स्थायी कर दिया गया था। स्कूल डवलपमेंट आफिसर्स भी इसी तरह अपने स्थायीकरण के लिए 2021 से ही संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो रही है।
    
2022 में श्रीलंका में राजपक्षे का जनता ने तख्ता पलट दिया था। इस तख्ता पलट के बाद श्रीलंका की जनता ने यह उम्मीद की थी कि अब जो सरकार बनेगी वह उनकी समस्याओं को हल करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दरअसल राजपक्षे का तख्ता पलट होने के बाद जो सत्ता पर बैठे वह भी पूंजीवादी पार्टी के नेता ही थे। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 3 अरब डालर कर्ज लेने की शर्तों के फलस्वरूप उन्हीं नीतियों को आगे बढ़ाया जो देशी-विदेशी पूंजी के हितों के अनुरूप हैं। 
    
इन नीतियों के फलस्वरूप श्रीलंका में बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि सार्वजनिक सेवाओं का निजीकरण किया जाना है। इस समय मौजूद जनथा विमुक्ति पेरनुमा और नेशनल पीपुल पावर की सरकार निजीकरण की नीतियों को आगे बढ़ा रही है और इसलिए कभी बिजली क्षेत्र के कर्मचारी हड़ताल पर उतरते हैं तो कभी स्वास्थ्य क्षेत्र के। सरकार श्रीलंका की जनता की उम्मीदों का गला घोंट रही है। आम मेहनतकश जनता आज फिर वहीं खड़ी है जहाँ वह राजपक्षे की सरकार के समय थी।  
    
फर्क सिर्फ यह है कि जनता इस बीच अपनी ताकत के दम पर राजपक्षे की दमनकारी सरकार का अंत कर चुकी है और अपनी ताकत को महसूस कर चुकी है। लेकिन उसे यह समझना बाकी है कि केवल सत्ता को बदल देना ही काफी नहीं है। उसे उस सत्ता को अपने हाथ में लेकर उसको चलाना होगा। मुनाफे की व्यवस्था को हटाकर मानवकेंद्रित व्यवस्था कायम करनी होगी।

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