उम्मीद -प्रियदर्शन
मुझे इतिहास से उम्मीद थी
कि वह लोगों को कुछ जरूरी सबक देगा
मुझे वर्तमान से उम्मीद थी
कि वह पुरानी गलतियां नहीं दुहराएगा
मुझे इतिहास से उम्मीद थी
कि वह लोगों को कुछ जरूरी सबक देगा
मुझे वर्तमान से उम्मीद थी
कि वह पुरानी गलतियां नहीं दुहराएगा
जिसे कहा जा रहा है
स्वाधीन भारत का अमृत-काल
वह अनृत-काल है, सच पूछो तो
सुहाने झूठों का जंजाल
इसे ही देखो
बिहार-यू पी से चलायी जा रही हैं जो नई ट्रेनें
अर्द्ध-दास का स्वामी ऐसा बर्बर आदमी होता था जो मवेशियों के मुखिया को ही खलनायक मानता था; कर्मियों को काम पर रखने वाला मालिक तो सभ्य माना जाता है और जिन ‘आदमियों’ को वह का
दूध की कीमत एक सेंट बढ़ गई,
एक क्वार्ट पर एक पैसा ज्यादा,
और एक अमीर आदमी ने गर्मियों के महीनों में
अपनी सामान्य आय से पांच हजार ज्यादा कमा लिए।
घृणा यूं कोई बहुत अच्छी चीज नहीं है
बहुत खून पी जाती है और खा जाती है
फेफड़ों की बहुत सारी शक्ति
बहुत सारे सपने, भोलापन और नींद कई रातों की
बहुतेरे बहुत अधिक हुआ करते हैं
वे गायब हो जाएं, बेहतर होगा।
लेकिन वह गायब हो जाये, तो उसकी कमी खलती है।
अब तक छिपे हुए थे उनके दांत और नाखून।
संस्कृति की भट्ठी में कच्चा गोश्त रहे थे भून।
छांट रहे थे अब तक बस वे बड़े-बड़े कानून।
नहीं किसी को दिखता था दूधिया वस्त्र पर खून।
खाने की टेबल पर जिनके
पकवानों की रेलमपेल
वे पाठ पढ़ाते हैं हमको
‘संतोष करो, संतोष करो।’
जैसे निहाई पर लोहे का पत्थर ढाला जाता है
वैसे ही हम नए दिन ढालेंगे
ताकत और पसीने से नहाए हुए
हम पाताल में उतरेंगे
और धरती के गर्भ से नया वैभव जीत लाएंगे
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।