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IITs में ट्रोजन हार्स ने सेंध लगाई है -वासुदेवन मुकुंथ

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पिछले कुछ दशकों से, ‘इंडियन नालेज सिस्टम’ (IKS) नाम का एक प्रोजेक्ट पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। भारत के अपने बौ

नार्डिक देशों की स्वच्छ वायु और कल्याणकारी योजनाओं का खर्च वैश्विक दक्षिण कैसे वहन करता है -उत्कर्ष मिश्रा (अंश)

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डेनमार्क, फिनलैंड, नार्वे और स्वीडन अपनी जीडीपी का 25-30 प्रतिशत सार्वजनिक सामाजिक सेवाओं पर खर्च करते हैं, जो ओईसीडी के औसत 20 प्रतिशत से कहीं अधिक है। यहां के निवासियों

भारत में इंसाफ का नया चेहरा : सेंगर, आसाराम, अखलाक के हत्यारों के लिए अलग कानून -वीर सांघवी

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बहुत ज्यादा वक्त नहीं बीता है, इसलिए मुझे लगता है कि हम में से कई लोगों को 2017 का उन्नाव रेप केस याद होगा। भारी जन आक्रोश के बाद, अदालतों ने आखिरकार भारतीय जनता पार्टी (

दो महीने बीत जाने के बाद भी, युद्धविराम किसी घेराबंदी जैसा लगता है --हसन अबो क़मर

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पिछले दो वर्षों में गाजा की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी को जबरन विस्थापित किया गया है। सार्थक पुनर्निर्माण न होने के कारण, गाजा शहर के दक्षिण-पूर्व में जैतून इलाके में 9 दिस

जीडीपी आंकड़ों से भरोसा क्यों उठा -अरूण कुमार

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भारत के राष्ट्रीय खातों पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की निराशाजनक रिपोर्ट ने देश के वृहद आर्थिक आंकड़ों की संदिग्ध प्रकृति की ओर एक बार फिर ध्यान खींचा है। 26 नवं

मुसलमानों का यथार्थ और राष्ट्रवाद का मिथक -देवेन्द्र

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गांव को लेकर हमारे जीवन और जेहन में जितनी भी यादें हैं, उसमें घर वालों के अलावा सबसे ज्यादा आत्मीय याद समतुल्लाह चाचा की ही है। उनके बगैर मेरे घर की कोई दिनचर्या उन दिनों

‘सिर्फ हम ही क्यों?’..

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नई दिल्लीः उत्तरी दिल्ली में अपने मामूली किराये के कमरे में बैठे हुए, दिल्ली विश्वविद्यालय में बी.काम.

मई दिवस की उत्पत्ति क्या है? -रोजा लक्जमबर्ग (1894)

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आठ घंटे के कार्य दिवस को प्राप्त करने के साधन के रूप में सर्वहारा में अवकाश मनाने का सुखद विचार सबसे पहले आस्ट्रेलिया में पैदा हुआ था। वहां के मजदूरों ने 1856 में आठ घंटे

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।