मजदूर आवाज

जेन जी आक्रोश पर सवार हो आगे बढ़ती काकरोच जनता पार्टी

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भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा बेरोजगार युवाओं को काकरोच कहे जाने की प्रतिक्रिया में काकरोच जनता पार्टी पैदा हुई थी। अमेरिकावासी अभिजीत दिपके द्वारा सोशल मीडिया पर व्यंग्

मार्च-अप्रैल-मई : मजदूर उभार के 3 माह

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भारत का मजदूर वर्ग उदारीकरण- निजीकरण की नीतियों के भारत में लागू होने के बाद की सबसे तीव्र लहरों में से एक (और संभवतः सबसे व्यापक) से गुजर रहा है। यद्यपि यह लहर अप्रैल मा

हरियाणा में वेतन वृद्धि और पूंजीपतियों की चीख-पुकार

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पिछले दिनों गुड़गांव के आई एम टी मानेसर में हरियाणा सरकार द्वारा लागू न्यूनतम वेतन वृद्धि को लागू करवाने के लिए मजदूरों हड़तालों का तांता लगा रहा। होंडा फैक्टरी से शुरू हुआ

अमेरिकी साम्राज्यवाद के हमले व आतंक के साये में ‘मई दिवस’

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यह एक सच्चाई है कि जितने लोग दूसरे विश्वयुद्ध में मारे गये थे उससे कहीं अधिक लोग दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों के हमले, प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष युद्ध में मारे जो चुके हैं। और यह भी सच है कि जब तक साम्राज्यवाद, पूंजीवाद जिन्दा रहेगा तब तक मानव जाति का यूं ही कत्लेआम होता रहेगा। 

दुनिया भर में उठी आवाज : ट्रम्प-नेतन्याहू खूनी हैं!

28 फरवरी को जैसे ही अमेरिकी साम्राज्यवादियों और उनके पिट्ठू इजरायल ने ईरान पर मनमाने तरीके से हमला बोला, वैसे ही दुनिया भर में इस अन्यायपूर्ण युद्ध के खिलाफ जनता के सड़कों

मेघालय : कोयला खदान में विस्फोट, 27 मजदूरों की मौत

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मेघालय में 5 फरवरी को एक कोयला खदान में विस्फोट होने से 27 मजदूरों की मौत हो गयी। अभी भी कई मजदूर 100 मीटर गहरे गड्डे में फंसे हैं। यह खदान पूर्वी जयंतिया हिल्स में थांगस

2025 में अरबपतियों की संपत्ति में भारी वृद्धि हुई

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ब्रिटेन स्थित चैरिटी संस्था आक्सफैम द्वारा सोमवार को प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट में यह दस्तावेजीकरण किया गया है कि तानाशाही और युद्ध का हिंसक विस्तार वैश्विक सामाजिक असमानत

मुख्य न्यायाधीश की सोच

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* देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने घरेलू कामगारों को न्यूनतम वेतन दिये जाने की याचिका यह कहकर ठुकरा दी कि इससे हर घर ‘कानूनी युद्धभूमि’ बन सकता है। 

तीसरे सप्ताह भी जारी है न्यूयार्क नर्सों की हड़ताल

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न्यूयार्क की नर्सों की हड़ताल तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है। जहां नर्सें बहादुरी के साथ अपनी जीवन परिस्थितियों में सुधार के लिए संघर्ष कर रही हैं। वहीं उनकी यूनियन नौ

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।