मजदूर आवाज

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कृष्ण और सुदामा की आड़ लेते भ्रष्टाचारी

चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने के नाम पर लाये गये इलेक्टोरल बांड खुद ही भ्रष्टाचार का माध्यम बन गये। ये भ्रष्टाचार इतना बढ़ता गया कि इस चंदे का 90 प्रतिशत तक सत्ताधारी पा

उत्तर प्रदेश के विद्युत विभाग में कर्मचारियों के शोषण-उत्पीड़न और दमन की दास्तान

विद्युत विभाग को आप और हम सर्व प्रथम उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के नाम से जानते थे जिसकी स्थापना वर्ष 1959 में हुई थी। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के गठन के सम

समाज में बढ़ते महिला अपराधों का कारण पुरुष प्रधान मानसिकता

आज समाज में अपराधों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। साम्प्रदायिक दंगां से लेकर महिला अपराधों तक, हत्या से बलात्कार तक, सभी की संख्या पहले से कहीं ज्यादा है। और इन अपराधो

बेलसोनिका यूनियन का प्रबंधन की छंटनी के खिलाफ ढ़ाई साल का शानदार संघर्ष, लड़ाई जारी है

बेलसोनिका प्रबंधन की छंटनी की साजिशों के खिलाफ यूनियन का वर्ष 2021 से संघर्ष जारी है। वर्ष 2021 से वर्ष 2023 तक चले लगभग ढ़ाई साल के इस शानदार संघर्ष में बेलसोनिका प्रबंधन

शोषण की चक्की में पिसते इंपीरियल आटो के मजदूर

इंपीरियल आटो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड प्लाट नंबर 21/1 कंपनी फरीदाबाद के सेक्टर 5 में स्थित है। यह कंपनी गाड़ी इंजन के लिए पार्ट्स बनाती है। फरीदाबाद के स्तर पर इंपीरियल

कनाडा : सार्वजनिक क्षेत्र के लाखों कर्मचारी हड़ताल पर

8 दिसम्बर से कनाडा के क्यूबेक प्रांत के लाखों कर्मचारी एक सप्ताह की हड़ताल पर हैं। इनमें अध्यापक, स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारी के अतिरिक्त अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मच

बारिश और पेड़

कल रात धरने पर बारिश हुई,
धरना स्थल पर ही कुछ पेड़ हैं 
जो अपनी ओट से अपने
नीचे आने वाले जीवों को धूप, बारिश से 
बचाते रहते हैं
जब बारिश होती है 

ब्रह्म हत्या

‘भिक्षाम देही’ टीवी पर सीरियल चल रहा है। तिवारी जी गांव में बैठकर कोई नाटक देख रहे हैं। कभी किसी ब्राह्मण को भिक्षा मांगकर जीवन यापन करते हुए देखते हैं, तो कभी किसी आश्रम

अनिश्चितता के दौर से गुजरती सेन्चुरी पेपर मिल

लालकुंआ/ वैसे तो अनिश्चितता पूंजीवादी एवं साम्राज्यवादी समाजों में लगातार बनी रहती है। निश्चितता केवल इस बात में निहित है कि संकटग्रस्तता की ओर बढ़ता समाज

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।