मजदूर आवाज

रतन टाटा और नीरा राडिया

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आजकल जब रतन टाटा के निधन से पूंजीवादी मीडिया बहुत दुखी है तब कुछ बात नीरा राडिया के बारे में भी होनी ही चाहिये।
    

सैमसंग इलेक्ट्रानिक्स के मजदूरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

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तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के निकट श्रीपेरम्दुर में स्थित सैमसंग इलेक्ट्रानिक्स के करीब 1500 स्थायी मजदूर 9 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। ये मजदूर वेतन वृद्धि, यू

वेतन वृद्धि का पाखण्ड

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बीते दिनों देश के सभी प्रमुख अखबारों में खबर छपी कि केन्द्र सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में बड़े पैमाने पर वृद्धि कर दी है। कुछ अखबारों ने तो मजदूरों की दिवाली खुशनुमा होने के

अमेरिका की तेल रिफाइनरी डेट्रोईट के मजदूर हड़ताल पर

जो मजदूर हड़ताल पर गये हैं वे कम्पनी में सुरक्षा व्यवस्था देखते थे

अमेरिका की तेल रिफाइनरी कम्पनी डेट्रोईट के 270 मजदूर अपने कांट्रेक्ट के नवीनीकरण के लिए 5 सितम्बर से हड़ताल पर चले गये हैं। ज्ञात हो कि इन मजदूरों का कांट्रेक्ट 31 जनवरी 2

इजराइल से और भारतीय मजदूरों के लिए बुलावा

आत्मनिर्भर भारत पर रोजगार इजराइल में

एक तरफ जहां इजराइल की कम्पनियों द्वारा भारतीय कामगारों की कुशलता पर प्रश्न चिह्न उठाये जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर इजराइल के दूतावास ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा है कि भारत और इ

बुद्धिजीवी भ्रम बेचते हैं - पार्टी जीतती है, लोग हारते हैं -रंगनायकम्मा

गरीबी का मुख्य कारण पूंजीवादी उत्पादन पद्धति है जो बड़े पैमाने पर श्रम का शोषण करती है

बुद्धिजीवी लोग संविधान और लोकतंत्र को मासूम बच्चों की तरह लागू मानकर चुनाव के मौजूदा दौर पर भविष्यवाणियां कर रहे हैं। ये बुद्धिजीवी चाहते हैं कि कोई ऐसी पार्टी सत्ता में

मजदूर वर्ग पर ‘‘लेबर कोड्स’’ के हमले के खिलाफ प्रतिरोघ की शुरूआत ‘‘वर्ग सचेत मजदूरों’’ को करनी होगी

लेबर कोड्स : मजदूर वर्ग पर हमला

मजदूरों व मजदूर यूनियनों के बीच लेबर कोड्स का हमला प्रतिरोध का कोई विषय नहीं बन पा रहा है। मजदूर यूनियनें लेबर कोड्स को मजदूरों पर हमले के रूप में नहीं ले पा रही हैं। औद्

तीन नए आपराधिक कानूनः मजदूरों-मेहनतकशों के संघर्षों को रोकने की कवायद

मोदी सरकार ने अगस्त, 2023 के संसद सत्र में आपराधिक कानूनों से संदर्भित तीन विधेयकों को पास किया था। गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में इन विधेयकों को पास कराते समय बोला था कि

विस्फोटक बेरोजगारी और बंशी बजाता नीरो

भारत में बेरोजगारी का आंकड़ा आजादी के बाद सर्वोच्च स्तर तक पहुंचा हुआ है। बेरोजगारी विस्फोटक रूप ले चुकी है इसका प्रमाण जब-तब देखने को मिलता रहता है। अभी हाल में गुजरात के

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।