वेदांता के पावर प्लांट में विस्फोट, 14 मज़दूरों की मौत

Published
Sun, 01/04/2026 - 15:50
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15 अप्रैल की दोपहर को छत्तीसगढ़ में सक्ति जिले में सिंघितराई गांव में वेदांता के पावर प्लांट में विस्फोट होने से 14 मज़दूरों की मौत हो गयी है। इसके अलावा 20 अन्य मज़दूर घायल हो गये। यह विस्फोट बायलर से भाप के जाने वाली हाई प्रेसर ट्यूब में हुआ।

यह घटना दिखाती है कि फैक्ट्रियों में किस तरह सुरक्षा नियमों में ढील दी जा रही है। फैक्टरी प्रबंधन द्वारा फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों में ढिलाई देने, उस पर खर्चा न करने का परिणाम दुर्घटनाओं के रूप में सामने आता है।

इस घटना पर प्रधानमंत्री मोदी ने "गहरा दुख" व्यक्त करते हुए मरने वाले मज़दूर के परिवार को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये देने की घोषणा की है।

मज़दूर मर जाता है और सरकार 2 लाख रुपया देकर सो जाती है। फैक्टरी चलती रहती है। न तो दुर्घटनाओं की जांच होती है न किसी को इन मौतों के लिए सजा मिलती है।

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

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तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?