विविध

छात्रों-मजदूरों ने उठाई न्याय के लिए आवाज

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दिल्ली/ 7 सितंबर को जब दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में एक इमारत के गिरने से मारे गए छात्रों को न्याय दिलाने और दिल्ली सरकार व द

प्रगतिशील महिला एकता केंद्र का सम्मेलन सम्पन्न

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रामनगर/ 5-6 सितंबर 2026 को प्रगतिशील महिला एकता केंद्र ने रामनगर, उत्तराखंड में अपना दो दिवसीय चैथा सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न किया। सम्मेलन में उत्तराख

मासा के 10 वर्ष पूरे होने पर सेमिनार

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मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA) ने नई दिल्ली के सुरजीत भवन सभागार में ‘‘मासा की 10 वर्षों की यात्रा और भारत में हाल का मजदूर आंदोलन’’ विषय पर एक दिवसीय सेमिनार 30 अगस्त

उत्तराखंड के यूजी-पीजी डाक्टरों का कार्य बहिष्कार

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हल्द्वानी/ राजकीय मेडिकल कालेज हल्द्वानी के एमबीबीएस इंटर्न और पीजी डाक्टरों का कार्य बहिष्कार 7 सितम्बर से चल रहा है। इंटर्न की मांग स्टाइपेंड 17,000 रु

हिंदू फासीवादी और लद्दाख

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केंद्र सरकार ने लद्दाख को नया झुनझुना थमाने की कोशिश की है। काफी पहले हिंदू फासीवादियों ने जम्मू कश्मीर के विभाजन और 370 के खात्मे से पहले भी इस इलाके की जनता को ढेरों झू

हरियाणा: सफाईकर्मियों का संघर्ष

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हरियाणा में बीते लगभग डेढ़ माह से सफाईकर्मियों का जुझारू संघर्ष चल रहा है। इस संघर्ष में कभी चढ़ाव कभी उतार आता रहा है। पर सफाईकर्मियों खासकर महिला सफाईकर्मियों के जोश-उत्स

सूरत : मजदूर फिर सड़कों पर

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सूरत के टैक्सटाइल व कढ़ाई मजदूर अगस्त माह में सड़कों पर उतरे थे। वे प्रमुखता से रविवार अवकाष, 8 घंटे का काम व ओवरटाइम के दोगुने भुगतान की मांग कर रहे थे। तब एक ओर प्रशासन न

बैल्डर

/baildar

धर्मेन्द्र! ड्यूटी नइखे आवत का रे?

बड़े शहरों की पहचान: कूड़े के पहाड़

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आजकल कोई चीज अगर सर्वव्याप्त है तो वह है कूड़े के ढेर। कूड़े के ढेर का कोई इतिहास तो मिलता नहीं। ये तो आधुनिक विकसित सभ्यता में ही पैदा हुआ है। सिन्धु घाटी सभ्यता बहुत विकस

भारतीय अर्थव्यवस्था: रहस्यमयी व अविश्वसनीय

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इस वर्ष के दो लोकप्रिय जनउभार के पीछे बढ़ती महंगाई व बेरोजगारी (बदहाल शिक्षा के साथ) ही थे। पहला जनउभार इस वर्ष के अप्रैल-मई माह में भारत के बेहद कम मजदूरी व बढ़ती महंगाई से हैरान-परेशान मजदूरों का था। और दूसरा जनउभार जून-जुलाई माह में छात्र-युवाओं का था जो बार-बार विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक होने से परेशान थे।

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।