विविध

काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल पूरे होने पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

/kakori-train-action-ke-sau-saal-poore-hone-par-vibhinna-programme

9 अगस्त, 1925 के दिन लखनऊ के निकट काकोरी में क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना लूट लिया था। इतिहास में यह घटना काकोरी ट्रेन एक्शन के नाम से प्रसिद्ध है जिसने कि अंग्रेजों की

वेतन भुगतान को संघर्षरत उपनल कर्मचारी

/salary-bhugatan-ko-sanghrshrat-upanal-emplyoee

हल्द्वानी/ उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में पूरे पदों पर भर्तियां करने की जगह उसके विकल्प में आउअसोर्सिंग भर्तियां की जा रही हैं। स

भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी पर आक्रोशित युवा

/entrance-exam-mein-gadabadi-par-akroshit-yuvaa

दिल्ली/ एसएससी (कर्मचारी चयन आयोग) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में गड़बड़ियों के खिलाफ देशभर में छात्रों-शिक्षकों का असंतोष है। यह असंतोष सड़कों पर विरोध प्रदर्

बांग्लाभाषी मजदूरों के उत्पीड़न का विरोध

/banglabhashi-majdooron-ke-utpidan-ka-virodha

गुड़गांव/ पिछले 15-20 दिनों से गुरुग्राम में हरियाणा पुलिस द्वारा सरेआम किसी भी बांग्लाभाषी लोगों को (जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय से हैं) बिना किसी आरोप के पकड़ा जा रहा है, धमकाया

कुरुक्षेत्र में मासा का फासीवाद विरोधी सम्मेलन

/kurukshetra-mein-masa-ka-fascism-virodhi-sammelan

कुरुक्षेत्र/ कुरुक्षेत्र में 23 जुलाई को राईं धर्मशाला (नजदीक छोटा रेलवे स्टेशन थानेसर) में मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा), जो कि देशभर के 14 क्रांतिक

संघी शासन में अफवाहें और रात भर जागते लोग

/sanghi-government-mein-rumors-and-night-bhar-jagate-log

उ.प्र.-उत्तराखण्ड के कई जिलों में गांवों-शहरों में लोग रात-रात भर जाग रहे हैं। वे इस खौफ में जाग रहे हैं कि कोई ‘द्रोण चोर’ उनके यहां डकैती न डाल दे। लोग हाथों में डण्डे

वाह री मुस्तैदी

/vaah-ri-mustaidi

दिल्ली/ कौन कहता है भाजपा सरकार में पुलिस मुस्तैद नहीं है। दिल्ली में एक ‘खतरनाक साजिश’ का पर्दाफाश किया गया।
    

उत्तराखंड में क्लस्टर योजना के विरोध में प्रदर्शन-ज्ञापन

/uttarakhand-mein-cluster-yojana-ke-virodha-mein-pradarshan-gyapan

हल्द्वानी/ उत्तराखंड में कक्षा 1 से 12 तक सरकारी विद्यालयों को क्लस्टर/मर्जर करने से विद्यालयों के बन्द होने के विरोध में परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

मजदूर संघर्ष संगठन का स्थापना सम्मेलन

/workers-sangharsa-sangathana-kaa-sathaapanaa-samamaelana

मेरठ/ मजदूर संघर्ष संगठन का स्थापना सम्मेलन मेरठ के मलियाना में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की शुरुआत क्रांतिकारी गीत के साथ हुई। इसके बाद सर्वसम्मत

आलेख

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।