विविध

सत्ता के खेल में प्यादे को जिंदा रखना

मेवात के नूंह दंगों में आरोपी, कुख्यात और बदनाम व्यक्ति बिट्टू बजरंगी जो संजय एनक्लेव फरीदाबाद का रहने वाला है, आजकल फिर सुर्खियों में है। मेवात के नूंह दंगों में मोनू मा

नया साल : चुनावी साल

नया साल भारत सहित दुनिया के कई-कई देशों के लिए चुनावी साल है। इसमें हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है तो दुनिया की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी ताकत संयुक्त राज्य अमेरिका भी है तो र

इंटरार्क के मजदूर नेता की गिरफ्तारी

रुद्रपुर/ दिनांक 23 दिसम्बर 2023 को पंतनगर थाना पुलिस द्वारा इंटरार्क मजदूर संगठन उधमसिंह नगर के महामंत्री सौरभ कुमार को कायराना तरीके से गिरफ्तार कर लिय

काकोरी के शहीदों की याद में विभिन्न कार्यक्रम

हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़े क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश सत्ता को सीधे चुनौती देते हुये 9 अगस्त, 1925 को लखनऊ के नजदीक काकोरी के पास रेलगाड़ी रोककर सरकारी खजाना लूट

8 फरवरी : मजदूर प्रतिरोध दिवस

दिल्ली/ देश भर के 17 संघर्षरत श्रमिक संगठनों/यूनियनों के समन्वय मंच, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने 23 दिसम्बर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्र

महान सर्वहारा नेता लेनिन

महान समाजवादी अक्टूबर क्रांति के नेता लेनिन की मृत्यु 21 जनवरी 1924 को हुई थी। उनकी मृत्यु को 100 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। बीते 100 वर्षों के इतिहास पर महान अक्टूबर समा

धारा-370 फैसला : जी हुजूर, सिर-माथे पर !

संविधान की धारा-370 को निष्प्रभावी करने के केन्द्र सरकार के 2019 के फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये हालिया फैसले ने वर्तमान मुख्य न्यायाधीश से उम्मीद लगाये उदा

मंदिर राम का, वोट भाजपा का

प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां जोरों पर हैं। चुनावी वर्ष में चुनाव से कुछ समय पूर्व मंदिर उद्घाटन संघ-भाजपा को वोटों की नयी खेप

कुश्ती संघ चुनाव : जिसका अंदेशा था वही हुआ

भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के चुनाव लंबे समय से टलते-टलते 21 दिसंबर को सम्पन्न हुए। चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह के बेहद करीबी संजय सिंह को जीत मिली। संजय सिंह की जीत के बाद ब

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।