विविध

तीन नये अपराधिक कानून

तीन नये अपराधिक कानून जिनको पास कराया गया है उसके गुण-दोष जो भी हों, बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि कानून का व्यवस्था मशीनरी इस्तेमाल कैसे करेगी और न्यायपालिकाएं उस

काकोरी के शहीद

काकोरी के शहीदों को याद करें,
उनकी बलिदानी राहों को समझें।
आज भी उनकी कहानी जिंदा है,
उनके बलिदान की नहीं कहीं निंदा है।

संसद में धुंआ

13 दिसम्बर को देश की संसद में कुछ नौजवान छापामार तरीके से घुस गये। उन्होंने जूते में छिपी सामग्री से संसद में रंगीन धुंआ उड़ाया और नारे लगाने लगे। संसद के बाहर भी कुछ नौजव

महिलाओं के साथ बढ़ती हिंसा

2023 दिसंबर की शुरुआत में एनसीआरबी (नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो) की ‘क्राइम इन इंडिया’ रिपोर्ट जारी हुई है। ये रिपोर्ट हर साल जारी की जाती है। हर साल महिलाओं के खिलाफ बढ़त

पूंजीवादी जनतंत्र में ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ चुनाव

उदारीकरण-वैश्वीकरण के दौर में पूंजीपति वर्ग ने ‘इतिहास के अंत’ में ‘उदार पूंजीवादी जनतंत्र की अंतिम विजय’ के बाद काफी प्रगति की है। उसने अब पूंजीवादी जनतंत्र को महज ‘स्वत

कनाडा : सार्वजनिक क्षेत्र के लाखों कर्मचारी हड़ताल पर

8 दिसम्बर से कनाडा के क्यूबेक प्रांत के लाखों कर्मचारी एक सप्ताह की हड़ताल पर हैं। इनमें अध्यापक, स्वास्थ्य क्षेत्र के कर्मचारी के अतिरिक्त अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मच

वैश्विक निवेशक समिट और मोदी

2002 के गुजरात दंगों के आयोजन के बाद गुजरात के तब के मुख्यमंत्री रहे मोदी ने 2003 में वाइब्रेंट गुजरात का आयोजन करवाया था। यह ग्लोबल इन्वेस्टर्स सम्मेलन था जिसमें देशी और

प्रदूषण, पराली, सरकार व न्यायपालिका

किसानों द्वारा पराली (धान की फसल का पुआल जो हारवेस्टर से कटाई के बाद खेतों में पड़ा रहता है) जलाने पर न्यायालय के आदेश के तहत सरकारों द्वारा कठोर कार्यवाही की जा रही है। क

नया सुपरवाइजर

एक पुरानी कहावत है, एक तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा, मसलन यदि करेले की बेल नीम के पेड़ पर चढ़ जाए तो नीम और भी कड़वा हो जाता है। मनोज कड़वा तो पहले से ही था मगर वर्मा जी के साथ ने

बाघ और तेंदुये के आतंक से निजात दिलाने को जनता संघर्षरत

रामनगर (नैनीताल) में कार्बेट से लगे गांवों में बाघ और तेंदुये के आतंक और कार्बेट प्रशासन व सरकार द्वारा इंसानों के बजाय जंगली जानवरों की जान को अधिक अहमियत देने के कारण ग

आलेख

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।