पुरानी पेंशन को लेकर संघर्ष तेज
पुरानी पेंशन को लेकर भारत के अलग-अलग राज्यों में आंदोलन तेज होता जा रहा है। कुछ राज्यों ने पुरानी पेंशन योजना को लागू भी कर दिया है। इससे बाकी राज्यों में भी मजदूर-कर्मचा
पुरानी पेंशन को लेकर भारत के अलग-अलग राज्यों में आंदोलन तेज होता जा रहा है। कुछ राज्यों ने पुरानी पेंशन योजना को लागू भी कर दिया है। इससे बाकी राज्यों में भी मजदूर-कर्मचा
रुद्रपुर/ माननीय राष्ट्रीय लोक अदालत के आदेश को लागू कराने की मांग को लेकर पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत 26 नवंबर 2023 को इंटरार्क कंपनी सिडकुल पंतनगर व क
गुड़गांव/ अपनी मांगों को लेकर बेलसोनिका मजदूरों का प्रतिरोध धरना 12 अक्टूबर से जारी है और अभी भी मजदूरों के हौंसले बुलंद हैं। बेलसोनिका मजदूर लगातार अपनी
उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी जिले में, कई दिनों तक सुरंग में फंसे रहे मजदूरों ने भारत में विकास के चरित्र और तौर-तरीकों पर अनेकानेक प्रश्न खड़े कर दिये हैं। जो सवाल सबसे बड़ा है
पंतनगर/ दिनांक 30 अक्टूबर 2023 को छुट्टी के दिन बिना मजदूरी के काम से मना करने पर प्रजनक बीज उत्पादन केंद्र (पंतनगर वि.वि.) के अफसर द्वारा कुछ मजदूरों को
इजरायल फिलिस्तीन के बीच वर्तमान संघर्ष के दौरान एक बार फिर इस्लाम विरोध चरम पर है। भारत के हिन्दू फासीवादियों से लेकर पश्चिमी साम्राज्यवादी शासक सभी इस्लाम पर निशाना साध रहे हैं। तरह-तरह से बताया ज
‘भिक्षाम देही’ टीवी पर सीरियल चल रहा है। तिवारी जी गांव में बैठकर कोई नाटक देख रहे हैं। कभी किसी ब्राह्मण को भिक्षा मांगकर जीवन यापन करते हुए देखते हैं, तो कभी किसी आश्रम
इजरायल द्वारा फिलिस्तीनी अवाम का नृशंस नरसंहार लगातार जारी है। फिलिस्तीन के अस्पतालों, स्कूलों और शरणार्थी कैम्पों में मारे जाने वाले और घायल बच्चों की तस्वीरें और वीडियो
रुद्रपुर/ इंटरार्क कम्पनी के मजदूरों का संघर्ष निरन्तर जारी है। जिला प्रशासन की मध्यस्थता में हुए समझौते को लागू कराने की मांग को लेकर इंटरार्क कंपनी के
कल रात धरने पर बारिश हुई,
धरना स्थल पर ही कुछ पेड़ हैं
जो अपनी ओट से अपने
नीचे आने वाले जीवों को धूप, बारिश से
बचाते रहते हैं
जब बारिश होती है
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।