आदिवासी छात्राओं को संगठित गिरोह ने बनाया शिकार

मध्य प्रदेश आदिवासियों के उत्पीड़न को लेकर समय-समय पर सुर्खियों में रहता है। कुछ समय पहले यहां एक भाजपा नेता द्वारा आदिवासी व्यक्ति के सिर पर पेशाब करने का मामला सुर्खियों में रहा। मौजूदा मामला आदिवासी छात्राओं का है।

एक गैंग जो आवाज बदलकर (महिला की आवाज में) आदिवासी छात्राओं को फोन करता था। अपना परिचय छात्रा के कॉलेज के किसी स्टाफ के तौर पर देता था। वह छात्रों को छात्रवृत्ति या अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने जैसी बातों से विश्वास में लेता थे। छात्राओं को इसका लाभ दिलवाने के बहाने किसी सुनसान जगह में बुलाकर उनके साथ रेप किया जाता था।

इस मामले में कई एफआईआर हुई। बृजेश प्रजापति, लवकुश प्रजापति, राहुल प्रजापति, संदीप प्रजापति चार आरोपियों को पकड़ा गया। आरोपियों ने स्वीकारा कि अब तक 7 घटनाओं को इस तरह से अंजाम दिया गया।

समाज में आदिवासी महिलाओं के साथ इस तरह संगठित अपराध पूंजीवादी व्यवस्था पर ही प्रश्न चिन्ह खडे करता है। जहां महिलाएं खासकर गरीब महिलाएं अभी तक सुरक्षित नहीं हैं। वह नित नये-नये ढंग से लम्पटों की हैवानियत का शिकार हो रही हैं।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

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जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

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शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

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जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है