उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड को इस 18 सितम्बर तीन साल पूरे हो गये हैं लेकिन अंकिता के परिजनाें को अभी भी पूरा इंसाफ नहीं मिला है। इस हत्याकांड के तार सत्ता से सीधे जुड़े हुये हैं, जिसके खुलासे के लिये शुरु से ही सी बी आई जांच की मांग हो रही है। अंकिता जिस रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी करती थी उस पर हत्याकांड की रात ही बुल्डोजर चला दिया गया। अंकिता के परिजनों का आरोप है कि सुबूत मिटाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया। इसी तरह उस वी वी आई पी की अभी भी गिरफ्तारी नहीं हुई है जिसके पास अंकिता को देह व्यापार हेतु भेजा जा रहा था; और जब अंकिता ने इससे इंकार कर दिया तो उसकी हत्या कर दी गई। जन संघर्ष के दबाव में सेशन कोर्ट से भाजपा नेता के पुत्र पुलकित आर्य समेत तीन लोगों को उम्रकैद की सजा मिली है, लेकिन ये लोग अब ऊपरी अदालत से जमानत पाने और बरी होने की कोशिश कर रहे हैं।
ऐसे में सेशन कोर्ट से सजा पाये अपराधियों को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी छूटने नहीं देने अपितु कड़ी से कड़ी सजा दिलवाने; पूरे मामले की सी बी आई जांच करवाने एवं वी वी आई पी की गिरफ्तारी की मांग के साथ इस हत्याकांड की तीसरी बरसी पर 18 सितम्बर के दिन उत्तराखंड कई शहरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गये।
नैनीताल मे क्रांतिकारी-जनवादी गीतों के साथ विशाल रैली निकाली गई। तदुपरान्त हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि जब तक अंकिता भंडारी के परिजनों को पूरा इंसाफ नहीं मिलता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। वक्ताओं ने पिठौरागढ़ की नन्हीं परी के बलात्कारी हत्यारों के सुप्रीम कोर्ट से बरी होने पर भी भारी आक्रोश जताया और उत्तराखंड में बढ़ते यौन अपराधों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। रैली में उत्तराखंड लोक वाहिनी, उत्तराखंड महिला मंच, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, महिला एकता मंच, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, समाजवादी लोक मंच, भाकपा (माले) एवं कांग्रेस से जुड़े लोगों ने भागीदारी की।
रामनगर में लखनपुर चुंगी पर धामी सरकार का पुतला दहन कर अंकिता भंडारी हत्याकांड की सी बी आई जांच की मांग की। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने जसपुर में 13 साल की बच्ची की बलात्कार और हत्या पर गहरा रोष जताया और कहा कि उत्तराखंड समेत देश भर में बेटियां न तो सुरक्षित हैं और न ही उन्हें न्याय मिल रहा है। विरोध प्रदर्शन में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, इंकलाबी मज़दूर केंद्र, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी और परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।
लालकुआं में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के आह्वान पर प्रदर्शन कर उत्तराखंड सरकार का पुतला दहन किया गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती यौन हिंसा के लिये पूंजीवादी अश्लील उपभोक्तावादी संस्कृति को जिम्मेदार ठहराया। विरोध प्रदर्शन में इंकलाबी मज़दूर केंद्र और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की।
रुद्रपुर में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र के आह्वान पर विभिन्न सामाजिक, छात्र व मज़दूर संगठनों एवं ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया औऱ उधमसिंह नगर के जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में मांग की गई कि उत्तराखंड सरकार अंकिता भंडारी प्रकरण में हाईकोर्ट में पूरी जिम्मेदारी के साथ पैरवी करे ताकि अपराधी न तो बरी हों और न ही वे जमानत पर बाहर आ सकें। इसके अलावा ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि रुद्रपुर की मज़दूर महिला सुनीता को जान से मारने की धमकी देने और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले गुंडा तत्वों और उन्हें सुपारी देने वाले डॉलफिन कंपनी मालिक प्रिंस धवन, इसके अलावा लाल सिंह गंगवार को तत्काल गिरफ्तार किया जाये। साथ ही, सुनीता और उनके परिजनों को सुरक्षा प्रदान की जाये।
विरोध प्रदर्शन में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, श्रमिक संयुक्त मोर्चा, इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, डॉल्फिन मजदूर संगठन, एरा श्रमिक संगठन,सी एस टी यू, ऑटोलाइन इम्प्लाइज यूनियन इत्यादि से जुड़े लोगों ने भागीदारी की।
हरिद्वार के बादशाहपुर में विरोध प्रदर्शन के साथ उत्तराखंड सरकार का पुतला फूंका गया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि आज केंद्र की सत्ता पर फ़ासीवादी ताकतें काबिज हैं और इनके कार्यकाल में दलितों, मुसलमानों और मज़दूरों-किसानों के साथ महिलाओं पर भी हमले लगातार बढ़ रहे हैं। खुद सरकार और सत्ताधारी पार्टी बलात्कारियों को संरक्षण दे रही है। विरोध प्रदर्शन में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, प्रगतिशील भोजन माता संगठन एवं क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के कार्यकर्ताओं ने भागीदारी की।