अर्जेण्टीना में तिहरे महिला हत्याकाण्ड पर जनता उद्वेलित

अर्जेण्टीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में 19 सितम्बर के आस-पास दो 20 वर्षीया महिलाओं व एक 15 वर्षीय लड़की को हत्यारों के गिरोह ने प्रताड़ित कर मार डाला। इनके क्षत-विक्षत अवस्था में दफनाये गये शव 24 सितम्बर को फ्लोरेसियो बरेला शहर के एक घर में पाये गये।

हत्यारों ने हत्या व प्रताड़ना का सीधा प्रसारण एक निजी सोशल मीडिया ग्रुप पर किया और उन्होंने हत्या एक ड्रग तस्करी संगठन को चेतावनी संदेश देने के लिए किया जाना बताया जिसने उनका ड्रग्स चुरा लिया था। हत्यारे व्यक्ति ने वीडियो में कहा कि ‘मेरे ड्रग्स चुराने वालों के साथ ऐसा ही होता है’’।

इस हत्याकांड की खबर फैलते ही अर्जेण्टीना के विभिन्न शहरों में सामाजिक व नारीवादी संगठनों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये। 24 सितम्बर से शुरू हुए ये प्रदर्शन लगातार जारी हैं। प्रदर्शनकारी इस हत्याकाण्ड के पीछे कहीं न कहीं राज्य की नीतियों को मान रहे हैं।

अर्जेण्टीना में बढ़ती बेकारी के बीच नशे का कारोबार व वेश्यावृत्ति का धंधा तेजी पकड़ रहा है। बेकारी से त्रस्त युवतियां वेश्यावृत्ति के दलदल में ढकेली जा रही है तो साथ ही बेकारी की मार झेल रहे युवा नशे की लत में व नशे की तस्करी में ढकेले जा रहे हैं। इस सबको अंजाम तक पहुंचाने के लिए ड्रग्स सप्लाई, उसकी तस्करी व वेश्यावृत्ति से जुड़े तमाम माफिया गिरोह पैदा हो गये हैं। इन्होंने अपनी समानान्तर व्यवस्था सरीखी कायम कर ली है। ये गिरोह परस्पर विवादों के शिकार भी होते रहे हैं। जो इन्हें कत्लेआमों तक भी ले जाता रहा है। मौजूदा तिहरा हत्याकाण्ड भी इसी कड़ी का हिस्सा है। सरकार दरअसल न तो ड्रग्स माफिया से निपटती है और न ही नशे के कारोबार पर कोई लगाम कसती है। साथ ही सरकार द्वारा स्वास्थ्य से लेकर जनकल्याण की मदों से हाथ खींचने का यह अवश्यंभावी परिणाम सामने आया है कि अर्जेण्टीना में नशीली दवायें, उनकी तस्करी बढ़ती पर है। इस तस्करी को अंजाम देने के लिए आपराधिक गिरोह भी पैदा हो जाते हैं।

प्रदर्शनों में जहां कुछ लोग नशे उसकी तस्करी पर लगाम की मांग कर रहे थे वहीं कुछ सरकार से अपरा धक गिरोहों पर कार्यवाही की मांग कर रहे थे तो कुछ सरकार को इस हत्याकांड के लिए दोषी ठहरा रहे थे। नारीवादी ‘‘कोई भी जीवन डिस्पोजेबल नहीं है’’ नारे के तहत स्त्रियों के प्रति पितृसत्तात्मक हिंसा का विरोध कर रहे थे। वे गिरोहों के बीच बदले के लिए स्त्रियों को निशाना बनाने का विरोध कर रहे थे।

आलेख

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

/ameriki-iimperialism-ka-trade-war-cause-&-ressult

लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?

/iran-par-mandarate-yuddha-ke-badal

इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं

/prashant-bhushan-ka-afsos-and-left-liberal-ka-political-divaliyapan

गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि