ब्राजील चुनाव: धुर दक्षिणपंथी की वापसी का खतरा

Published
Fri, 10/16/2026 - 07:50
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ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव हेतु पहले चरण का मतदान 4 अक्टूबर को सम्पन्न हुआ। इस चुनाव में राष्ट्रपति पद के किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत मत न मिलने के चलते आगामी 25 अक्टूबर को शीर्ष 2 प्रत्याशियों के बीच दोबारा चुनाव होगा। पहले चरण में पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो के पुत्र फ्लेवियो बोल्सोनारो 47 प्रतिशत मत से पहले स्थान व लूला डि सिल्वा 45 प्रतिशत मत के साथ दूसरे स्थान पर रहे। अब 25 अक्टूबर को इन दोनों प्रत्याशियों में से एक को चुनने के लिए मतदान होगा। 
    
इस चुनाव को जहां एक ओर अमेरिकी साम्राज्यवादी तो वहीं दूसरी ओर उसके प्रतिद्वन्द्वी के बतौर उभर रहे चीनी साम्राज्यवादी पूरी दिलचस्पी के साथ देख रहे हैं। इन दोनों ताकतों के हित इन दोनों प्रत्याशियों से जुड़े हुए हैं। अमेरिकी साम्राज्यवादी बोल्सोनारो पर दांव लगाये हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि बोल्सोनारो की जीत से अमेरिकी साम्राज्यवादियों की ब्राजील के महत्वपूर्ण खनिजों व दुर्लभ धातुओं पर पहुंच सुनिश्चित होगी और इस मामले में चीन पर उनकी निर्भरता कम होगी। वहीं चीन लूला पर दांव लगाए हुए है। वर्तमान राष्ट्रपति लूला भी यद्यपि अमेरिका से टैरिफ व व्यापार समझौता करने को उत्सुक हैं पर वे अमेरिकी साम्राज्यवादियों के सम्मुख पूर्ण समर्पण को तैयार नहीं हैं। वे ब्राजील की सम्प्रुभता को बनाये रखते हुए अमेरिका से समझौते को प्रयासरत रहे हैं व इस हेतु चीनी साम्राज्यवादियों के साथ सम्बन्धों को बढ़ा कर अमेरिका पर दबाव कायम करने की राह अपनाते रहे हैं। इन अर्थों में लूला की जीत से जहां चीनी साम्राज्यवादियों के नेतृत्व वाले ब्रिक्स गठबंधन को मजबूती मिलने की संभावना है वहीं बोल्सोनारो की जीत इस गठबंधन में ब्राजील की भूमिका कमजोर करने की ओर ले जायेगी। 
    
फ्लेवियो बोल्सोनारो के पिता व पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो ब्राजील में तख्तापलट की साजिश में 27 वर्ष की कैद काट रहे हैं। अमेरिका जायर बोल्सोनारो के खिलाफ आरोप वापस लेने के लिए ब्राजील पर दबाव डालता रहा है। फ्लेवियो बोल्सोनारो की जीत की दशा में उनके पिता की सजा माफी की संभावना भी पैदा हो जायेगी। 
    
वर्कर्स पार्टी के लूला डि सिल्वा 2023 में तीसरी बार ब्राजील के राष्ट्रपति बने थे। ये खुद को वामपंथी नेता के बतौर प्रस्तुत करते रहे हैं पर वास्तव में ये कुछ दिखावटी सुधारों के साथ ब्राजील के पूंजीपति वर्ग के प्रतिनिधि ही रहे हैं। ट्रम्प के सत्तासीन होने और उसकी वर्चस्वकारी नीतियों ने लूला के लिए मुसीबतें बढ़ाने का काम किया। ट्रम्प द्वारा थोपे टैरिफ ने ब्राजील की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया और लूला की लोकप्रियता में गिरावट आयी। इस दौरान अपने पिता की तरह ही जूनियर बोल्सोनारो अमेरिकी सहयोग से अपनी दक्षिणपंथी राजनीति को ब्राजील में प्रसारित करने में कामयाब रहा और अब पहले चरण में राष्ट्रपति चुनाव में पहले स्थान पर पहुंचने में सफल रहा। 
    
पहले चरण के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने वाले मनोचिकित्सक-लेखक आगस्टो क्यूरी जो अवन्ति पार्टी के नेता हैं, ने दूसरे चरण के चुनाव के लिए बोल्सोनारो को समर्थन देने की घोषणा की है। इस समर्थन से दूसरे चरण में बोल्सोनारो का पलड़ा भारी होने का अनुमान लगाया जा रहा है। क्यूरी को पहले चरण में 2.89 प्रतिशत मत मिले थे।
    
इस चुनाव में लूला अमेरिकी हस्तक्षेप का भी आरोप लगाते रहे हैं। चुनाव से पूर्व कुछ अमेरिकी लोगों को उन्होंने ब्राजील आने से रोकने का भी काम किया है। फ्लेवियो बोल्सोनारो का बड़ा भाई भी अमेरिका में रहता है। उस पर भी अपने पिता के साथ ब्राजील में तख्तापलट साजिश में शामिल होने का आरोप लगता रहा है। 
    
अगर दूसरे चरण में लूला किसी तरह जीत भी जाते हैं तो ब्राजील की संसद में दक्षिणपंथी ताकतों का वर्चस्व उन्हें अमेरिकी साम्राज्यवादियों के आगे कुछ हद तक झुकने को मजबूर करेगा।
    
जहां तक प्रश्न ब्राजील की जनता का है तो पूंजीपतियों के ये दोनों प्रतिनिधि जनता के दुश्मन हैं।  

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