इजरायल का युद्धोन्मादी, भ्रष्ट व क्रूर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अब पूरी गाजा पट्टी पर कब्जा करना चाहता है। गाजा शहर पर कब्जा करने के लिए उसने इजरायली कैबिनेट की दस घंटे तक बैठक की और फिर इजरायली सेना को मजबूर किया है कि वह उसकी योजना के अनुसार काम करे। असल में इजरायली सेना का शीर्ष नेतृत्व इस योजना का विरोध कर रहा था परन्तु अंत में उसे राजी होने को मजबूर कर दिया गया।
नेतन्याहू के फैसले का पूरी दुनिया में जोरदार विरोध हो रहा है। और यह विरोध जितना दुनिया में उतना ही इजरायल के भीतर भी है। हर शनिवार को होने वाले विरोध प्रदर्शनों की तरह 9 अगस्त को हजारों-हजार लोग तेल अवीव, जेरूशलम सहित पूरे इजरायल के हर शहर में सड़कों पर उतर आये। तेल अवीव का प्रदर्शन सबसे बड़ा था। वहां लोगों ने सड़कों को जाम कर दिया और तेल अवीव में सेना मुख्यालय को घेर लिया। प्रदर्शनकारी मांग कर रहे थे ‘बंधकों पर एक पूर्ण समझौता करो’, ‘युद्ध बंद करो’, ‘हमारे प्रियजनों को वापस लाओ’, ‘बंधकों की हत्या मत कराओ’। प्रदर्शनकारी सेना से मांग कर रहे थे कि वह ‘गाजा सिटी में प्रवेश करने से इंकार करे’ और इस ‘गैर कानूनी युद्ध में भाग लेने से मना कर दे’। बंधकों के परिवार के लोगों ने अगले हफ्ते (16 अगस्त) को आम हड़ताल का आह्वान किया है।
इजरायल के भीतर नेतन्याहू का विरोध बढ़ता ही जा रहा है। वह अब तक अपनी सत्ता एक के बाद दूसरे युद्ध के जरिये ही बना कर रख सका है। फिलिस्तीन (गाजा व वेस्ट बैंक सहित), लेबनान, ईरान, यमन, सीरिया से इजरायल लगातार उलझता रहा है और उन देशों में हमले करता रहा है। वह लेबनान के ऊपर हिजबुल्ला से हुए युद्ध विराम के बाद भी न केवल बमबारी करता रहा है बल्कि उसने लेबनान से सेना को वापस बुलाने से भी इंकार कर दिया है। गाजा सिटी में कब्जा करना उसकी युद्धोन्मादी व विस्तारवादी नीतियों का ही अगला चरण है।
गाजा शहर में करीब-करीब दस लाख फिलिस्तीनी रह रहे हैं। और यही एक जगह है जहां गाजा पट्टी में अभी कुछेक अस्पताल काम कर पा रहे हैं। गाजा शहर पर कब्जे का मतलब होगा इन दस लाख लोगों का जबरन विस्थापन किया जाए। हमास को हटाने के नाम पर यहां पर भीषण रक्तपात किया जाए। गाजा शहर में एक नये जनसंहार को अंजाम दिया जाए। गाजा पट्टी में पहले ही 60 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
गाजा पट्टी में महीनों से चल रहे नरसंहार का पूरी दुनिया में न्यायप्रिय व युद्ध विरोधी जनता विरोध कर रही है। ऐसे प्रदर्शन यूरोप, अमेरिका से लेकर सुदूर आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैण्ड में भी हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों का नतीजा यह है कि इन देशों के शासकों पर भारी जनदबाव पड़ रहा है। जनदबाव के परिणामस्वरूप एक के बाद दूसरे देश ने इजरायल के गाजा शहर पर कब्जे की योजना का विरोध किया है। जनदबाव का ही नतीजा है कि जर्मनी ने गाजा शहर के कब्जे के विरोध में इजरायल को हथियारों की आपूर्ति रोक दी है।
इजरायल के प्रधानमंत्री की गाजा शहर पर कब्जे की योजना की सं.राष्ट्र संघ, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड सहित कई देशों ने तीखी आलोचना की है। अरब देशों सहित तुर्की ने भी इसका विरोध किया है। एक सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे ‘‘छोटी बात’’ कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। इजरायल अमेरिका के दम पर ही पश्चिम एशिया में अपनी मनमानी करता रहा है।
नेतन्याहू ने अपनी जनता और पूरी दुनिया के विरोध के बावजूद 10 अगस्त को घोषणा की कि वह ‘गाजा पर इसलिए कब्जा कर रहा है ताकि गाजा को हमास से मुक्त करा सकें। कि ‘उसका गाजा पर पूर्ण कब्जे का कोई इरादा नहीं है’। नेतन्याहू ने अपनी प्रेस कान्फ्रेंस में यह भी झूठ सरेआम बोला कि उसने कभी गाजा में मानवीय सहायता पर रोक नहीं लगाई थी। नेतन्याहू के झूठ का पर्दाफाश वहीं के एक अखबार ‘टाइम्स आफ इजरायल’ ने किया। उसने बताया कि इजरायल ने 78 दिन तक मानवीय सहायता को पूर्ण रूप से रोक दिया था।
नेतन्याहू अपने इस युद्ध अभियान में कितना सफल होगा, इस पर नेतन्याहू के अलावा हर किसी को संदेह है। इजरायल की विपक्षी पार्टियों, पूर्व प्रधानमंत्रियों, पूर्व सेना अधिकारियों, पूर्व खुफिया प्रमुख के अलावा इजरायल की आम जनता इस नये युद्ध को एक भयानक त्रासदी के रूप में देख रही है। वे जान रहे हैं कि जितना नुकसान गाजा में फिलिस्तीनियों का होगा उससे कम नुकसान इजरायल का भी नहीं होगा। उन्हें डर है कि हमास से लड़ने के दौरान मारे गये अब तक सैकड़ों सैनिकों व हजारों घायल सिपाहियों की संख्या और बढ़ेगी। बंधक तो मारे ही जायेंगे। लेकिन नेतन्याहू अपने देश की जनता की आवाज को बलपूर्वक दबा रहा है। वह पूरी दुनिया की आलोचना कर रहा है। वह कह रहा है कि पूरी दुनिया हमास के प्रचार में झांसे में आ गयी है। असल में नेतन्याहू सत्ता की हवस और अहंकार में पागल हो गया है। उसका इलाज अब इजरायल की जनता के हाथ में ही सबसे ज्यादा है।