‘झूठ बोलने वालों की याददाश्त अच्छी होनी चाहिए’

यह एक डच कहावत है। झूठ बोलने वाले की याददाश्त अच्छी नहीं होगी तो जल्द ही पकड़ा जायेगा। वह तभी पकड़ा जा सकता है जब उसको पकड़ने वालों की याददाश्त भी अच्छी हो। अन्यथा झूठ बोलने वाला झूठ बोलता जायेगा और कभी नहीं पकड़ा जायेगा। 
    
कुछ ऐसा ही मोदी जी के साथ है। वह एक के बाद एक झूठ बोलते हैं परन्तु हैरत की बात है पकड़े जाने पर वह कभी माफी नहीं मांगते बल्कि अगली बार फिर एक नया झूठ बोल देते हैं। असल में तो मोदी का मूल मंत्र है, ‘‘झूठ बोलो, बार-बार झूठ बोलो, जितना हो सके उतना झूठ बोलो...’’। वैसे उन्होंने ऐसा अपने विरोधियों के लिए कहा था परन्तु समय ने साबित किया कि यह तो उनके ही जीवन का मूल मंत्र है। उनकी शिक्षा-दीक्षा, भ्रमण, विवाह, बचपन-जवानी आदि के बारे में उनके द्वारा समय-समय पर खुद ही झूठ फैलाये गये। 
    
डच कहावत मोदी के बारे में सच हो सकती है परन्तु उनके अनुयाइयों के लिए शायद ही सच हो। और विरोधी तो जो कुछ ताक में रहते हो परन्तु गूगल के जमाने में मोदी के झूठ की पोल तुरन्त खुल जाती है। इधर मोदी ने मनमोहन सिंह के बारे में कुछ बोला उधर लोगों ने उसकी पड़ताल कर डाली।

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