सरकार को झुकाने को अनवरत् संघर्ष जरूरी
12 फरवरी की आम हड़ताल पिछले कुछ वर्षों की हड़तालों से कहीं अधिक सफल रही। स्कीम वर्कर्स, गिग मजदूरों-सरकारी कर्मियों के साथ कई जगह निजी क्षेत्र की यूनियनों ने भी हड़ताल की। द
12 फरवरी की आम हड़ताल पिछले कुछ वर्षों की हड़तालों से कहीं अधिक सफल रही। स्कीम वर्कर्स, गिग मजदूरों-सरकारी कर्मियों के साथ कई जगह निजी क्षेत्र की यूनियनों ने भी हड़ताल की। द
गिग एंड प्लेटफार्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (जीआईपीएसडब्ल्यूयू) के आह्वान पर, भोजन और अन्य ऐप-आधारित ‘‘डिलीवरी पार्टनर’’ ने ‘‘सुरक्षा, संरक्षा और सम्मान’’ के अधिकार की मांग
मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA), जो देश भर के 14 जुझारू मजदूर संगठनों, यूनियनों और फेडरेशन का एक समन्वय मंच है, ने हाल में लागू किए गए नए मजदूर-विरोधी 4 लेबर कोड के खिल
देहरादून/ उत्तराखंड में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के 22,000 से अधिक संविदा कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण और समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इस बीच अलग-अलग वक
मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मजदूर विरोधी चार नये लेबर कोड्स लागू किये
केन्द्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों द्वारा आहूत आम हड़ताल 9 जुलाई को सफल हो गई। इस हड़ताल में केन्द्रीय फेडरेशनों ने करोड़ों मजदूरों की भागीदारी का दावा कर हड़ताल को सफल घोषित क
नई दिल्ली/ 19 मार्च 2025 को मारुति सुजुकी के अस्थायी कर्मचारियों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री कार्यालय में
10 जनवरी को हजारों मारुति सुजुकी के वर्तमान और पूर्व अस्थायी कर्मचारी कंपनी की अवैध श्रम प्रथाओं को चुनौती देते हुए श्रम विभाग को अपना सामूहिक मांगपत्र सौंपने के लिए गुड़ग
गिग एंड प्लेटफार्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने गिग वर्कर्स से अपील की है कि वे दीपावली पर अपने फोन बंद कर दें और ‘डिजिटल साइलेंस’ पर चले जाएं।
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।