मॉब लिंचिंग के प्रयास के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग के साथ धरना-प्रदर्शन

रामनगर (उत्तराखंड) के छोई व बैलपड़ाव में 23 अक्टूबर के घटनाक्रम में मॉब लिंचिंग के प्रयास के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग ने अब आंदोलन का रूप लेना शुरु कर दिया है। इस मामले में मुक़दमे दर्ज होने के एक सप्ताह बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने 29 अक्टूबर को तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन कर पुलिस-प्रशासन और सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

अब 31 अक्टूबर को व्यापार मंडल कार्यालय में बैठक कर आंदोलन की आगे की रणनीति पर विचार किया जायेगा।

गौरतलब है कि 23 अक्टूबर को वैध तरीके से बरेली से बड़े का मीट लेकर आ रहे दो वाहनों में से एक को भाजपा समर्थित गुंडा तत्वों ने छोई में रोक लिया था; और गौमांस ले जाने का आरोप लगाते हुये वाहन चालक नासिर पर जानलेवा हमला किया था। इस हमले में वे गंभीर रूप से घायल हुये हैं। जबकि दूसरे वाहन के चालक को बैलपड़ाव चौकी में चैकिंग के दौरान मारने की कोशिश की गई थी; हालांकि पुलिस ने चालक की किसी तरह वहां से हटाकर बचा लिया। दोनों ही जगहों पर वाहनों में भारी तोड़-फोड़ भी की गई।

इस संगीन अपराध पर सम्बन्धित धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तारी न होने से विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों में भारी रोष है; जिन्होंने 27 अक्टूबर को इसी बाबत एक ज्ञापन भी राज्य के मुख्यमंत्री, राज्यपाल एवं नैनीताल के जिलाधिकारी को प्रेषित किया था। तदुपरान्त 29 अक्टूबर को पूर्व घोषणा के अनुरूप तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन किया गया।

धरना-प्रदर्शन के दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि जो रामनगर में हुआ आज पूरे देश कि यही तस्वीर है। पिछले 10-11 सालों में मुसलमानों पर हमले लगातार बढ़ते गये हैं। आर एस एस-भाजपा द्वारा ये हमले न सिर्फ मुसलमानों पर बल्कि दलितों-आदिवासियों, महिलाओं व छात्रों-युवाओं, मज़दूरों-किसानों एवं मानवाधिकार कार्यकर्ताओं व पत्रकारों पर भी बोले जा रहे हैं। इन फ़ासीवादी हमलों का सभी को एकजुट होकर प्रतिरोध करना होगा। वक्ताओं ने कहा कि हमारा ये आंदोलन सामाजिक सद्भाव बनाये रखने एवं लोकतांत्रिक संवैधानिक व धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को स्थापित करने के लिए है।

वक्ताओं ने पुलिस-प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुये कहा सवाल किया कि जब भारतीय न्याय संहिता में स्पष्ट प्रावधान है कि 7 वर्ष से अधिक सजा के मुकदमों में आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाएगी तब फिर छोई व बैलपड़ाव के घटनाक्रम में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं की जा रही है ?

वक्ताओं ने अप्रैल 2023 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हेट स्पीच के संबंध में दिये गये निर्देश कि "हेट स्पीच करने वालों पर पुलिस स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाही करे" का हवाला देते हुये कहा कि छोई के घटनाक्रम में मुक़दमे में नामजद भाजपा नेता मदन जोशी सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार हेट स्पीच कर रहे हैं लेकिन पुलिस-प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

वक्ताओं ने कहा कि जिन नौजवानों हाथों में डिग्री और रोजगार का प्रमाण पत्र होना चाहिये था, आर एस एस-भाजपा ने उन हाथों में हथियार, पत्थर और लाठी-डंडे थमाकर उन्हें दंगाई और अपराधी बना दिया है। छोई और बैलपड़ाव के घटनाक्रम में इन लोगों ने नौजवानों को बहकाकर अपराध के दलदल धकेल दिया और अब खुद को बचाने में लगे हुये हैं। आम जनता को शिक्षा-चिकित्सा व रोजगार देने में नाकाम भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री धामी खुद ही लैंड जिहाद, लव जिहाद, नकल जेहाद जैसी असंवैधानिक शब्दावली का प्रयोग कर राज्य का माहौल खराब कर रहे हैं।

सभा में वक्ताओं ने कांग्रेस पार्टी के नेताओं, नगर पालिका अध्यक्ष तथा सभासदों से भी सवाल किया कि आखिर वे इतनी बड़ी घटना पर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं ? विधायक महोदय अभी तक गंभीर रूप से घायल नासिर का हाल-चाल लेने उनके पास क्यों नहीं गए ?

धरने प्रदर्शन को समाजवादी लोक मंच के मुनीष कुमार, इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला, महिला एकता मंच की ललिता रावत, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंवाल, आइसा के सुमित कुमार, किसान संघर्ष समिति के ललित उप्रेती, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के मौ आसिफ; तथा जीशान कुरैशी, मो. नबी अंसारी, जगमोहन रावत, कैसर राणा, असलम इत्यादि ने सम्बोधित किया। इसके अलावा पूर्व सभासद टीके खान सहित मुनव्वर हुसैन, सलमान, आकिब, सुलेमान, खुर्शीद अंसारी, मोनू समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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