एस आई आर : मुसलमानों के नाम काटने के हथकंडे

Published
Sun, 02/01/2026 - 07:00
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संघ-भाजपा में एक प्रतियोगिता चल रही है। यह प्रतियोगिता इस बात की है कि कौन सा नेता कितना घटिया-जहरीला-नफरती बयान दे सकता है। कौन मुसलमानों को कितनी भद्दी भाषा में गरिया सकता है। दिल्ली में कपिल गुर्जर, असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा सरीखे नेता इस प्रतियोगिता में अग्रणी चल रहे हैं। हालांकि इनके जमीनी लंपट कार्यकर्ता तो मां-बहन की गालियों के साथ इनसे भी चार कदम आगे निकल चुके हैं। खैर! जब गाली देना-अनर्गल बोलना ही संघ-भाजपा में ऊपर चढ़ने का तरीका बना हुआ हो तो योगी-धामी से लेकर निचले कार्यकर्ताओं में मची होड़ को समझा जा सकता है। 
    
अभी हाल में ही असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया कि असम में एस आई आर में ‘4-5 लाख मियां वोटरों’ के नाम मतदाता सूची से हटा दिये जायेंगे। उन्होंने रेखांकित किया  कि ‘‘हेमंत बिस्वा सरमा और भाजपा मियांओं के विरोध में है’’। साथ ही उन्होंने लोगों से ‘मियांओं’ को तंग करने का आह्वान भी किया क्योंकि जब इन्हें तंग किया जायेगा तभी ये राज्य छोड़ कर जायेंगे। असम में बांग्लाभाषी मुसलमानों को मियां कहा जाता है और हेमंत बिस्वा सरमा संघी लम्पट की तरह इन्हें तंग कर राज्य से भगाने की बात कर रहे हैं। इससे आगे बढ़कर हेमंत बिस्वा सरमा ने लोगों से मांग कर दी कि अगर रिक्शे में किराया 5 रु. हो तो किसी मियां रिक्शा चालक को 4 रु. ही दो। 
    
हेमंत बिस्वा सरमा ने एस आई आर की प्रक्रिया के वर्तमान चरण में भाजपा के कार्यकर्ताओं को फार्म-7 भरकर ‘मियांओं’ के नाम कटाने का  प्रयास करने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि इससे ये लोग चक्कर काटेंगे-परेशान होंगे और असम छोड़ कर चले जायेंगे। 
    
फार्म-7 किसी मतदान केन्द्र पर मतदाता सूची में शामिल कोई मतदाता दूसरे मतदाता के नाम को हटाने के लिए भर सकता है। फार्म भरने पर सम्बन्धित मतदाता की जांच की जायेगी या उसे चुनाव कार्यालय बुलाया जायेगा। जांच में मतदाता के कागज ठीक न पाये जाने पर उनका नाम सूची से हटा दिया जाता है। 
    
असम के मुख्यमंत्री के बिगड़े बोल बताते हैं कि कैसे मुसलमान मतदाताओं के नाम काटने का असम में संगठित अभियान चल रहा है। इस अभियान के विरोध में विपक्षी दलों ने बयान जारी कर कहा कि भाजपा फार्म-7 का उपयोग अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है और इस पर रोक लगनी चाहिए। 
    
वैसे चुनाव आयोग के फार्म 6,7,8 के तहत गलत व झूठी जानकारी देना दण्डनीय अपराध है पर असम के मुख्यमंत्री खुलेआम मुसलमान मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए फार्म-7 भरने का आह्वान कर रहे हैं। स्पष्ट है कि फार्म-7 में झूठी जानकारी देने वालों पर मुख्यमंत्री कोई कार्यवाही होने नहीं देंगे। या फिर भाजपाई चुनाव आयोग कोई कार्यवाही नहीं करेगा। 
    
स्थिति तब और गम्भीर हो जाती है जब मुसलमानों के नाम कटवाने के लिए हजारों फार्म भरे जाते हैं औ ये जिन मतदाताओं के नाम से भरे जाते हैं वे खुद ही इससे इनकार करने लगते हैं कि उन्होंने ऐसा कोई फार्म भरा। यानी भाजपा के लोग जानबूझकर किसी और के नाम पर फार्म भर मुसलमानों के नाम हटाने का प्रयास कर रहे हैं। 
    
इस पर असम का मुख्यमंत्री खुलेआम बांग्लाभाषी मुसलमानों को सरकार द्वारा तंग करने को जायज ठहरा रहा है। विपक्षी दलों ने फार्म-7 की आपत्तियों पर लोगों को और समय देने की मांग की है जिसे चुनाव आयोग ने मानने से इंकार किया है। 
    
इसी तरह की एक खबर राजस्थान के एक बीएलओ ने उजागर की। उसने दावा किया कि उस पर मुसलमान वोटरों के नाम हटाने के लिए भाजपा द्वारा दबाव डाला जा रहा है। जयपुर के हवामहल के बीएलओ कीर्ति कुमार ने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा लगाई गयी आपत्तियों के आधार पर उन पर प्रकाशित मतदाता सूची के मसौदे से 470 नाम (बूथ के 40 प्रतिशत) हटाने की मांग की जा रही है। बीएलओ ने बताया कि ये आपत्तियां मुसलमान मतदाताओं के नाम हटाने के लिए है जबकि वे पहले ही सारे नामों का सत्यापन कर चुके हैं। बीएलओ ने कलेक्टर कार्यालय जाकर आत्महत्या करने की भी बात कही। 
    
दरअसल फार्म-7 के जरिये राजस्थान में भी भाजपा संगठित तरीके से मुसलमान मतदाताओं के नाम पर आपत्ति डाल रही है। जबकि हिंदू बहुत इलाके में एक भी आपत्ति नहीं आ रही है। ऐसे में बीएलओ, जिनके क्षेत्र में मुसलमान मतदाता अधिक हैं, उनका काम बढ़ जा रहा है। उन्हें हरेक आपत्ति का घर-घर जाकर दोबारा सत्यापन करना व उसे इण्टरनेट पर अपलोड करना है। 
    
कुछ बीएलओ जहां सत्ता के दबाव के उलट खड़े हो जा रहे हैं वहीं यह भी संभव है कि ढेरों सत्ता के दबाव में फार्म-7 की शिकायतों के अनुरूप मुसलमान मतदाताओं की जानकारी के बगैर उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की संस्तुति कर दें। ऐसे में मतदाता सूची में हेराफेरी का संघ-भाजपा का लक्ष्य पूरा हो जा रहा है। 
    
राजस्थान में ड्राफ्ट मतदाता सूची में 42 लाख नाम कट चुके थे। अब अंतिम सूची 14 फरवरी को प्रकाशित होनी है। फार्म-7 के कारनामों के चलते मुसलमान मतदाताओं के और नाम कटने की संभावना है। 
    
असम व राजस्थान का घटनाक्रम केवल 2 राज्यों की ही बात नहीं है। यह अलग-अलग रूपों में पूरे देश में दोहराया जा रहा है। जाहिर है एस आई आर के जरिये फासीवादी सरकार अपने मतदाता चुन रही है। और खुद के भविष्य में भी सत्ता में बने रहने का इंतजाम कर रही है। 

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