* "उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला द्वारा सेंचुरी मिल्स के 874 श्रमिकों के रोजगार की हत्या ।
* रोजगार के लिए जारी है कानूनी और मैदानी संघर्ष
सेंचुरी मिल्स के श्रमिकों का संघर्ष पिछले 5 सालों से जारी है। हम हैं "श्रमिक जनता संघ" के सदस्य। हमारे संघर्ष का लम्बा काल का अनुभव से समृद्ध हैं , लेकिन आज जरूरत है, आप के समर्थन की !
17/10/ 2017 से याने करीबन 1900 से अधिक दिनों से हम सेंचुरी के मजदूर, रोजगार को बचाने के लिए अडिग हैं। देशभर में बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या बन गई है। क्योंकि आज हमें V.R.S. नहीं रोजगार चाहिए ।अब तक सेंचुरी के मजदूरों का आंदोलन रोजगार को लेकर जारी है। सेंचुरी कम्पनी ने फर्जी और गैर कानूनी तरीके से एक नहीं, दो-दो बार दो मिल्स -यार्न/डेनिम बेची गयी। पहली बार 2017 में वेयरिट कम्पनी को मात्र रु. 2.5 करोड़ में 1000 रूपये के स्टाम्प पेपर पर बेचा। मजदूरों के कोर्ट में चुनौती देने पर कम्पनी का फर्जीबाड़ा उजागर हुआ। और औद्योगिक न्यायाधिकरण, इंदौर और म.प्र. उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय ने मजदूरों को काम व वेतन देने का आदेश जारी किया। जबकि मजदूरों ने रोजगार की मांग की थी। और औद्योगिक न्यायाधिकरण ने मिल्स खोलने का आदेश दिया था लेकिन कंपनी ने केवल वेतन देना ही स्वीकार किया। मिल्स बंद रखते हुए हर महीने दो करोड़ रुपए वेतन के रूप में 44 महीनों तक उन्हें खर्चा करना पड़ा। सेंचुरी कंपनी ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25 (O)का पालन न करते हुए मिल्स बंद करना गैरकानूनी था। हर न्यायालय ने इसी को अपने फैसले में मान लिया था !
लेकिन फर्जी बिक्री रद्द करने के बाद जून 2018 में बिड़ला मेनेजमेंट के आर .के. डालमिया जी ने मेधा पाटकर जी से बातचीत में दोनों मिल्स, यार्न और डेनिम को मात्र 1 रुपया में देने का प्रास्ताव दिया और कहा कि मजदूर ही मिल्स को चलाए, बिरला मैनेजमेंट चलाने में असमर्थ है। इस पर जब मजदूरों के कंपनी चलाने की सहमति जताने पर वे अपने ही वादे से मुकर गए। यह हुआ, चार यूनियंस AITUC , INTUC, BMS और सेंचुरी एकता यूनियंस ने एक साथ मिलकर V.R.S. मंजूर करने का पत्र 7 अक्टूबर 2018 को सेंचुरी कंपनी को भेजने से, जो धोखाधड़ी थी। जबकि मात्र 10% श्रमिक, चारों यूनियन्स मिलकर, उस पक्ष में थे। तब कैसे तय कर सकते थे यूनियन्स और सेंचुरी कंपनी, 90% श्रमिकों की राय न लेते हुए? कंपनी ने यूनियंस के पत्र का मौका लिया तो हमने 'श्रमिक जनता संघ' की यूनियन स्थापित की और सत्याग्रह जारी रखा !
लॉकडाउन के समय में अचानक 29 जून 2021 को V.R.S. की नोटिस 90% मजदूरों की सदस्यता वाली यूनियन "श्रमिक जनता संघ " की सहमति के बिना सेंचुरी ने मिल्स बेचा। श्रमिकों की छटनी की! और मुआवजा कार्य किए हर साल के 25 दिन का और निवृति तक के बचे हर साल के 35 दिनों का वेतन (वह भी केवल बेसिक वेतन) ही देने का निर्णय जाहिर किया। इसे 90% मजदूरों ने नकारा, क्योंकि मजदूर रोजगार ही चाहते हैं, वीआरएस नहीं! क्योंकि रोजगार ही जीने का आधार और जीने का अधिकार भी है। 10 से 25 साल तक सेंचुरी के मिल्स में काम करने के बाद 5 लाख तक की राशि लेकर कैसे निकल पड़ेंगे श्रमिक? कैसे बिताएंगे पूरी जिंदगी? अपने बच्चों की पढ़ाई, बीमारी, आवास सभी का खर्च क्या निभा पाएंगे, जिंदगी भर ?
14 जुलाई 2021 को दूसरी बार फर्जी में ही उसी कंपनी (सेंचुरी यार्न/ सेंचुरी डेनिम) को बेचने का फर्जी नाटक किया गया। दूसरी बार कंपनी को संपत्ति की कीमत सिर्फ 62 करोड़ रुपए और रजिस्ट्री शुल्क मात्रा 6 करोड़ रुपए में बेचा है। 84 एकड़ औद्योगिक भूमि में स्थित यार्न/डेनिम दो मिल्स की व्यावसायिक/औद्योगिक भूमि को कृषि भूमि बताकर फर्जी रजिस्ट्री मात्र 6 करोड रुपए शुल्क में हुई है। और कम्पनी नेशनल हाईवे नंबर 3 में स्थित होने के बावजूद हाईवे और औद्योगिक क्षेत्र का नहीं बताया गया है जबकि 2017 में बिरला की दोनों मिल्स की कीमत खुद वेयरिट और बिरला मैनेजमेंट ने 426 करोड़ रुपये हाईकोर्ट में बतायी थी। इस फर्जीवाड़े के खिलाफ संघर्ष के टेंट/डेरे को मध्य प्रदेश शासन ने 3 अगस्त 2021 को, 500 महिला-पुरुष श्रमिकों की गिरफ्तारी के साथ उखाड़ दिया। फिर भी हमारा संघर्ष जारी है और आगे भी जारी रहेगा .....
हमारे "श्रमिक जनता संघ" की ओर से करोड़ों रुपयों की यार्न और डेनिम मिल्स की संपदा सेंचुरी कंपनी द्वारा द्वारा मनजीत कॉटन और मनजीत ग्लोबल को बेचने पर बिक्री नामा फर्जी और रजिस्ट्री शुल्क कम होने की शिकायत दर्ज की गई है। श्रमिकों द्वारा खरगोन (मध्य प्रदेश) जिला रजिस्टार को साल भर पहले जाँच हेतु शिकायत दर्ज की गई है। लेकिन अभी तक सेंचुरी और मंजीत कॉटन की बिक्री नामा और रजिस्ट्री की जाँच की रिपोर्ट जाहिर नहीं की गई है। जिससे फर्जीवाड़ा से रोजगार की हत्या होकर 874 श्रमिकों को काम में न लेते हुए मनजीत सिंह अन्य
उद्योगपतियों के जैसे ठेका मजदूरों पर दोनों मिल्स चला रहे हैं। उन ठेका मजदूरों का शोषण और अन्याय साफ दर्शाता है। निर्यात में प्रमुख रही मिल्स पूर्ण रूप से चलाई भी नहीं जा रही है।
आज हमारे "श्रमिक जनता संघ" के सदस्य संघर्षशील होकर पूर्व में आवंटित आवास (वर्कर्स कॉलोनी) में विवाद सुलझाने तक निवासरत रहे मजदूरों का बिजली-पानी 3 महीने तक बंद रखा गया। आखिर स्थानीय न्यायालय के आदेश से चालू हुआ। उनको अभी भी आने जाने में परेशान किया जा रहा है। वेतन 16 महीने से बंद होने के कारण अगर मजदूरी करने , सब्जी खरीदने या इलाज हेतु हॉस्पिटल भी जाते हैं तो उनको कॉलोनी में अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है। वे कुछ दिनों के लिए गांव गए तो उनके घरों के ताले भी तोड़े गए हैं। उनका सामान मनजीत कंपनी ने जब्त किया है। यह गैरकानूनी है!! जो मजदूर 25 वर्षों से उसी कॉलोनी में रहे हैं, जिन्होंने बिरला मैनेजमेंट की तिजोरी भरी है, आज उन मजदूरों के साथ ही अन्याय किया जा रहा है। यह तो श्रमिकों को हटाने और रोजगार को खत्म करने की साजिश साबित होती है। फिर भी हमारे श्रमिक, परिवार सहित वहीं डटे हुए हैं।
हम श्रमिकों का संघर्ष अब म.प्र. के उच्च न्यायालय में प्रलंबित है, क्योंकि मिल्स अवैध तरीके से राज्य शासन की मंजूरी और श्रमिकों की सुनवाई के बिना बंद की गई और अब बेची गई है। पहली बार फर्जीवाड़ा 2017 में और अब फिर दूसरी बार फर्जीवाड़ा हुआ है। यह विवाद औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत सुलझाना भी टाल रहा है, मध्य प्रदेश का श्रम मंत्रालय। तो हम कानूनी और मैदानी संघर्ष जारी रखे हुए हैं। श्रम आयुक्त कार्यालय के औद्योगिक न्यायाधिकरण (इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल) में विवाद प्रस्तुत न करने के खिलाफ मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में हमारी याचिका पर अंतिम सुनवाई बाकी है।
आइए, आज रोजगार को बचाने के लिए हमें संकल्प लिया जाना चाहिए। सेंचुरी के मजदूर भुक्तभोगी होते हुए भी रोजगार को बचाने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। कुमार मंगलम बिरला और मध्य प्रदेश शासन को कड़ा पत्र लिखकर आप भी रोजगार बचाने में सहयोग करें ताकि रोजगार को बचाया जाए, जिसकी आज देश को अहम जरूरत है !! उद्योगपतियों की मनमानी और मुनाफाखोरी से उपजी बेरोजगारी आत्महत्याओं का कारण बन गई है।
हमें विश्वास है कि आप हमारे याने रोजगार के समर्थक होकर इस 2000 से अधिक दिनों के संघर्ष पर त्वरित आवाज उठाएंगे। एक साल से अधिक काल तक वेतन रहित जिंदगी जीने वाले श्रमिकों को आप हर तरीके से साथ, सहयोग देंगे। यही अपेक्षा है। धन्यवाद! जिंदाबाद
श्रमिक जनता संघ, म.प्र.(खरगोन)