सफाई मजदूरों की मौत और सरकारी दावे

सफाईकर्मियों की काम के दौरान हादसे में मौत हो जाने की खबरें निरंतर आती रहती हैं। 2024 से जून 2025 के दौरान देश भर में ऐसी 158 मौतें दर्ज हुई हैं। मौतों के अलावा कई सफाईकर्मी काम के दौरान घायल भी होते हैं। बेहद खराब कार्यपरिस्थिति और सुरक्षा के कोई इंतजाम न होने के कारण यह हादसे होते हैं।

देश में इन हादसों के वितरीत केन्द्र सरकार ने 8 जून 2025 को दावा किया कि देश में हाथ से मैला ढोने की प्रथा समाप्त हो चुकी है। इससे पूर्व 2013 में हाथ से मैला ढोने वाले रोजगार का निषेध और पुनर्वास अधिनियम-2013 बन चुका है। 23 जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, बैंगलूर, हैदराबाद जैसे महानगरों में हाथ से मैला ढोने और खतरनाक सीवर सफाई पर पूर्ण प्रतिबंध होगा। लेकिन इन सब कानूनी फैसलों और सरकार के दावों के विपरीत जमीनी स्तर पर इससे उलट ही हो रहा है। आये दिन सफाई मजदूर हादसों का शिकार हो रहे हैं।

देश की राजधानी में ही 2 फरवरी 2025 को नरेला स्थित मानसा देवी अपार्टमेंट्स में सीवर की सफाई के दौरान 2 मजदूरों की मौत हो गयी और एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। इन मजदूरों को निजी ठेकेदार द्वारा बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतरने की लिए मजबूर किया गया। बुरी जीवन परिस्थितियों और बेरोजगारी के आलम में ठेकेदार और मालिक मजदूरों पर आसानी से दबाव बना देते हैं। सुरक्षा उपकरणों के खर्च से बचने के लिए वे मजदूरों के जीवन को ही जोखिम में डाल देते हैं।

फरवरी माह में ही कोलकाता में भी सीवर पाइप फटने के कारण मजदूर मैनहोल में बह गये। कई घंटे बाद जाकर उनकी लाश मिल पाई।

22 मई 2025 को राजस्थान, बीकानेर ऊनी वस्त्र मिल के सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय 3 मजदूरों की मौत हो गयी। 15 मई को राजस्थान में ही सेप्टिक टैंक में फंसे 5 मजदूरों की मौत हो गयी और 4 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गये। अप्रैल माह में पेपर मिल के सफाई टैंक में सफाई के दौरान दो मजदूरों की मौत हो गयी जिसमें एक नाबालिग था। 27 मई को जयपुर, सीमापुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित अचल ज्वैलर फैक्टरी की सेप्टिक टैंक की सफाई में 4 मजदूरों की मौत हो गयी और अन्य 4 को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इन मजदूरों पर सफाई टैंक में बची हुई गाद को साफ कर सोना-चांदी निकालने का दबाव बनाया गया था। राजस्थान में 2025 के 6 माह के भीतर ही 15 से अधिक मौतें सफाई मजदूरों की हो चुकी हैं।

पूरे देश की बात करें तो, 2024 में 116 और 2025 के 6 महीने में 42 मौतें सफाई मजदूरों की हुई हैं। यानी पिछले डेढ साल (2024 से जून 2025) में कुल 158 मौतें हुई हैं।

आलेख

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

/ameriki-iimperialism-ka-trade-war-cause-&-ressult

लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?

/iran-par-mandarate-yuddha-ke-badal

इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं

/prashant-bhushan-ka-afsos-and-left-liberal-ka-political-divaliyapan

गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि