उपराष्ट्रपति : बड़े बेआबरू हो.....
उपराष्ट्रपति धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर तरह-तरह की अटकलबाजियां की जा रही हैं। हर कोई इस बात पर एकमत है कि धनखड़ द्वारा स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे की जो बात कही गयी वह सच्चा
उपराष्ट्रपति धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर तरह-तरह की अटकलबाजियां की जा रही हैं। हर कोई इस बात पर एकमत है कि धनखड़ द्वारा स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफे की जो बात कही गयी वह सच्चा
एक बार फिर ‘डायन कुप्रथा’ अमानवीय कुकृत्य एवं 5 लोगों की हत्या के कारण चर्चा में है। 6-7 जुलाई की दरमियानी रात को बिहार के पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में ग्रामीणों की
चुनाव आयोग और संघी सरकार के मंत्रियों का दावा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही, पहले भी कई बार हो चुकी है यह सामान्य प्रक्रिया है, इस पर हंगामा क्यों! वास्तव में ये, यहां भी तथ्यों को तोड़-मरोड़कर मनमाने ढंग से प्रस्तुत कर रहे हैं। वास्तव में यह पहले के मतदाताओं का पुनरीक्षण भी है। विपक्ष का जहां तक सवाल है यह बुनियादी सवाल खड़ा करने के बजाय व्यवहारिकता पर ज्यादा प्रश्न खड़े कर रहा है। परीक्षण के लिए बेहद कम समय होना एक समस्या है मगर बुनियादी प्रश्न नहीं।
यह याद रखना होगा कि अपने पूंजीवादी जनतंत्र में पूंजीपति वर्ग ने आम जन को बहुत मजबूरी में दाखिल होने दिया था। उसने हर कदम पर प्रतिरोध किया था। केवल आम जन के तीखे संघर्षों के दबाव में ही वह क्रमशः पीछे हटा था। पीछे हट कर भी वह हमेशा असुविधा महसूस करता रहा। जनतंत्र में आम जनों के प्रवेश के बाद उनसे निपटने के लिए कभी फासीवाद की शरण लेता रहा तो कभी जनतंत्र को एकदम खोखला, औपचारिक बनाता रहा। अब फासीवादियों के एक बार फिर उभार के दौर में वह आम जन को भांति-भांति से जनतंत्र से बाहर करने की कोशिश कर रहा है।
बीते दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 75 वर्ष पूरे होने पर रिटायर होने व नये लोगों को आगे आने का मौका देने की बात कर मोदी को याद दिला दिया कि वे बहुत जल्द 17 सितम्बर 25 को
कांवड़ यात्रा शुरू होते ही हिन्दू धर्म के संघी लम्पट ठेकेदारों को भी रोजगार मिल जाता है। रोजगार समाज में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का, गुंडागर्दी करने का, मारपीट करने
पिछले दिनों से उत्तराखण्ड सरकार ने ‘आपरेशन कालनेमि’ चलाया हुआ है। इस पुलिसिया आपरेशन के तहत पुलिस वाले साधु वेष या भगवा वस्त्र पहने हुए लोगों की जांच पड़ताल कर रहे हैं। घो
पिछले दिनों महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा विभाग ने स्कूलों में कक्षा एक से पाठ्यक्रम में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी लागू करने का फैसला लिया। अभी तक राज्य में मराठी और अंग्रेजी ही पहली कक्षा से पढ़ाई ज
14 जून, 2025 को लाखों लोगों ने अमेरिका में 2,000 से अधिक स्थानों और 50 राज्यों में से प्रत्येक में ट्रम्प प्रशासन की दक्षिणपंथी नीतियों और तानाशाही तरीकों के खिलाफ विरोध
जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं।
ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।
लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?
इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं
गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि