उत्तराखंड में ‘आनर किलिंग’ के तहत दलित युवक की बेरहमी से हत्या

Published
Tue, 06/16/2026 - 06:51
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उत्तराखंड में ‘आनर किलिंग’ के तहत एक दलित युवक की बेरहमी से हत्या ने हमारे समाज में मौजूद जाति के कोढ़ को एक बार फिर सामने ला दिया है। टिहरी के देवल गांव के 18 वर्षीय केतन लाल का अपराध सिर्फ इतना था कि उसकी दोस्ती पड़ोसी लम्ब गांव की सवर्ण जाति की युवती से थी, जो कि उसके साथ ही पढ़ती थी। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करने लगे थे। लेकिन, युवती के परिजनों को यह स्वीकार्य नहीं था। उन्होंने धोखे से बातचीत के बहाने केतन लाल को खोलगढ़ वल्ला गांव बुलाया और उसे व साथ आये उसके दोस्त दिवाकर डिमरी को बंधक बनाकर लाठी-डंडों से बुरी तरह पीटा, जिसमें केतन लाल की मौत हो गई और उसका दोस्त गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस द्वारा युवती के पिता यशवीर सिंह पंवार एवं अन्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। 
    
झूठे जातीय दम्भ की खातिर किये गये इस हत्याकांड ने उत्तराखंड के ही 2022 के जगदीश हत्याकांड की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं। गौरतलब है कि भिकियासैंण के पनुवाधोखन गांव के दलित युवक जगदीश के प्रेम विवाह के कुछ दिनों बाद ही उसके सवर्ण ससुराल वालों ने बड़े निर्मम तरीके से उसकी हत्या कर दी थी।
    
हम देख रहे हैं कि देश में हिंदूवादी राजनीति की विषबेल फैलने के साथ न सिर्फ मुसलमानों पर अपितु दलितों पर भी हमले बढ़ रहे हैं। गुजरात के ऊना में ‘गौ रक्षकों’ द्वारा दलित युवकों की बेरहमी से की गई पिटाई का मामला हो या उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 वर्षीय दलित युवती के साथ सवर्ण युवकों द्वारा सामूहिक बलात्कार की घटना या राजस्थान में एक स्कूल में घड़े से पानी पीने पर सवर्ण शिक्षक द्वारा 9 वर्षीय दलित बच्चे की पीट-पीटकर की गई हत्या हो या मध्य प्रदेश के सीधी का पेशाब कांड..... जैसी घटनायें पूरे देश के साथ उत्तराखंड में भी बढ़ रही हैं। उत्तराखंड में पौड़ी के सतपुली में तो पुलिस की प्रताड़ना ने एक दलित युवक पंकज को आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर कर दिया।
    
दरअसल संघ-भाजपा की हिंदू राष्ट्र की परियोजना का दलितों के लिये यही मतलब भी है। जिस सनातन धर्म की हिंदूवादी संगठन वकालत करते हैं उसका आधार ही वर्ण-जाति व्यवस्था है। आखिर मनुस्मृति को संविधान बनाने की बातें यूं ही नहीं हो रही हैं!
 

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