मजदूर संघर्ष संगठन का स्थापना सम्मेलन

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मेरठ/ मजदूर संघर्ष संगठन का स्थापना सम्मेलन मेरठ के मलियाना में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की शुरुआत क्रांतिकारी गीत के साथ हुई। इसके बाद सर्वसम्मति से संगठन के पदाधिकारियों का चुनाव किया गया। प्रवेंद्र कुमार राष्ट्रीय अध्यक्ष, विक्रम प्रताप जनरल सेक्रेटरी, अमित बेरा उपाध्यक्ष, अभिषेक शिक्षा और संस्कृति मामले के सचिव, मोहित पुंडीर ट्रेड यूनियन सचिव, आशुतोष दुबे कार्यालय सचिव, आकाश मीडिया प्रभारी, जैनब महिला मोर्चा अध्यक्ष और विशाल कोषाध्यक्ष चुने गए। मेरठ से उत्कर्ष, शामली से दिव्यांश, बागपत से नवनीत, देहरादून से कुलदीप और शाहदरा से सन्नी को जिलाध्यक्ष बनाया गया।
    
सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने संगठन के उद्देश्यों, कार्यशैली और संगठन के कार्यों की रिपोर्ट पेश की। महिला मोर्चा अध्यक्ष जैनब 18 सूत्री प्रस्ताव पेश किया जो सर्वसम्मति से पास हुए। 
    
नेपाली मूल प्रवाह से कपिल खनाल,  सीएसटीयू से मुकुल, आईएमके से हरीश ने मजदूर संघर्ष संगठन के उद्देश्यों के साथ सहमति जताते हुए कहा कि आज मजदूर वर्ग पर हो रहे चौतरफा हमले का मुकाबला मिलकर ही किया जा सकता है।
    
ग्रामीण मजदूर यूनियन से कामरेड साहिल, बीएनइसयू से अनिरुद्ध, नैशनल अलायंस फार लेबर राइट्स से राजेश उपाध्याय ने कहा कि आज मजदूर वर्ग में क्षेत्रवाद, जातिवाद, साम्प्रदायिक सोच से लड़ने के लिए मजदूर वर्गीय विचारधारा जरूरी है।
    
पंतनगर विश्वविद्यालय से कृषि वैज्ञानिक आर पी सिंह, पुणे से विजय एडवोकेट, इफ्टू(न्यू) से पी के शाही, नारी मुक्ति संगठन से आशु वर्मा, नौजवान भारत सभा से अमरपाल, किसान एकता केंद्र से प्रवीण ने कहा कि मौजूदा पूंजीवाद-साम्राज्यवाद के खिलाफ किसान, मजदूर और अन्य मेहनतकश तबकों को एकजुट हो लड़ना होगा और समतामूलक समाज की नींव रखना होगा।
    
अंत में कोषाध्यक्ष ने सभी को धन्यवाद दिया।         -दिल्ली संवाददाता

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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