खुद ही घोषित कर देने से कौन गुरु स्वीकारेगा
लहरा दोगे ज्ञान का परचम तब ही जग पहचानेगा
प्रचलित ही अच्छा है सब कुछ ये आवाज
पुरानी है क्या, कैसे, कब, क्यों, किस कारण,
साधक प्रश्न उठाएगा
अब तक रही धारणा जो भी, उस पर
मेरा दृढ़ मत है
पर उसका भी स्वागत होगा, नए तर्क जो लाएगा
ज्ञानी भरसक सत्य में डूबा ज्ञान की
अलख जगाएगा बाजारू थोथा होकर भी
झूठे गाल बजाएगा
सत्य कहां बंधकर रहता है ग्यान तेरा,
मेरा भी है तुझको उसको मुझको
सबको एक दिन एक बनाएगा
-एक पाठक