जानवर और इंसान

Published
Sat, 08/01/2026 - 15:50
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वैसे तो खाली समय कब होता है लेकिन जब कोई जानवर बन्दर, घोड़ा, ऊंट आदि दो पैरों पर चलने की कोशिश करता है तो थोड़ी बहुत हंसी आ ही जाती है। यह शायद इसलिए होता हो कि कुछ लोग दो पैरों पर चल भी लें तो इंसान नहीं बन सकते। दूसरे जानवरों में से कोई इंसान बनना भी चाहेगा तो कौन सा इंसान बनेगा। इंसानों में बहुत सारी वैरायटी है। एक इंसान वह है जो अंग्रेजी शराब की फैक्टरी लगा रहा है, एक इंसान उसको लाइसेंस जारी कर रहा है, एक इंसान वह होगा जो उस फैक्टरी में मैनेजर होगा और और होंगे उसका हुकुम बजाने वाले इंचार्ज जो वहां पर काम करने वाले इंसानों पर नियंत्रण करेंगे। ये वही लोग होते हैं जिसे हेल्पर या सहायक कहते हैं।
    
यह शराब जब तैयार होकर पेटियों में पैक हो जायेगी तो ड्राइवर द्वारा गाड़ियों में भरकर गोदामों में पहुंचायी जायेगी और फिर दूसरे ड्राइवर इसे शराब की दुकानों में पहुंचायेंगे। बड़े लोग महंगी वाली शराब बियर बार में बैठकर आराम से पियेंगे, इसमें बर्फ भी चांदी किये हुए चिमटे से डाली जायेगी और नया बिजनेस शुरू करने या पुराने बिजनेस को बढ़ाने पर बात होगी। इन्हें कोई जल्दी नहीं होती है, इनके लिए दुनिया ठहर सी गयी होती है। मई-जून की गर्मी में हल्की रोशनी से जगमग बियर बार और हर समय वेटर तैयार आर्डर लेने के लिए। पनीर टिक्का से लेकन बोनलेश मटन और तन्दूरी चिकन गर्मा गर्म परोसे जाने के लिए तैयार। ये मटन उसी बकरे से आता है जिसको किसी गांव के चरवाहे या उसके बच्चे कुछ साल तक तपती दोपहरी में भी चराते होंगे। 
    
अब एक इंसान नहीं बल्कि बहुत सारे इंसान हैं जो दूसरे टाइप के हैं। ये वे इंसान हैं जो मेहनत से इंसान बने थे लेकिन इनसे इतना काम करवाया गया कि ये काम करते-करते जानवरों जैसी हालत में पहुंच गये। ये सस्ती शराब लेकर ठेके के पास कूड़े के ढेर में शराब पी लेते हैं। इनके लिए पैग का कोई मानक नहीं होता बस गटकना होता है और थोड़ा बहुत किसी को गाली दे रहे होते हैं। 
    
जब भी ट्रक के कारखाने से कोई ट्रक बनकर निकलता है तो उसी के समानान्तर कहीं और किसी मां का बेटा तैयार हो गया होता है जो उस ट्रक का ड्राइवर या खलासी भी बनने के लिए तैयार हो चुका होता है। ड्राइवर या खलासी उस ट्रक या दूसरे ट्रक के साथ दस-पन्द्रह साल तक हर मौसम में सड़कों की धूल फांकते रहेंगे। इसी के साथ कहीं कोई सुबह-सुबह दौड़ लगा रहा होगा पुलिस में भर्ती होने के लिए। यही पुलिस वाला उनको मां-बहन की गालियां देगा और उगाही भी करेगा। ट्रक जब सड़क पर उतरता है तो बीमे के साथ उतरता है लेकिन उस ड्राइवर का बीमा भला कौन कम्पनी और कितने का करेगी।  
    
जो लोग पहले इंसान बने थे अब वे जानवर बन रहे हैं। इसने वैज्ञानिकों की समस्या हल कर दी। अब इंसान ने खुद साबित कर दिया कि वह भी जानवर ही है। उसने बस कपड़े पहन लिये हैं। किसी इंसान को बिना कपड़ों-जूतों के और बिना पैसों के किसी अनजान शहर में छोड़ दो तो लोग उसे इंसान मानेंगे ही नहीं और खुद को भी वह जानवर ही समझेगा। आज उसके पास पैसा है तो वही उसकी ताकत है। कुछ जानवर जिनके हाथ में हथियार आ गये उन्होंने अपनी एक अलग सत्ता बना ली और जल, जंगल, जमीन, समुन्दर और आसमान पर कब्जा कर लिया। अब नये दो पैरों पर चलने वाले वाले इंसानों की जरूरत पुराने मानव ने खत्म कर दी।         -खबीस, फरीदाबाद
 

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