जैसी करनी वैसी भरनी
7 अक्टूबर शनिवार के दिन हमास ने इजरायल पर जो जोरदार हमला बोला वह इजरायल के क्रूर जियनवादी शासकों को हतप्रभ करने वाला रहा। इजरायल के धूर्त, क्रूर और भ्रष्ट प्रधानमंत्री ने
7 अक्टूबर शनिवार के दिन हमास ने इजरायल पर जो जोरदार हमला बोला वह इजरायल के क्रूर जियनवादी शासकों को हतप्रभ करने वाला रहा। इजरायल के धूर्त, क्रूर और भ्रष्ट प्रधानमंत्री ने
26 जुलाई को अफ्रीका का एक और देश तख्तापलट का शिकार हो गया। नाइजर के राष्ट्रपति मोहम्मद बाजौम को उनके ही गार्डों ने बंधक बनाकर इस तख्तापलट को अंजाम दिया। तख्तापलट के पश्चा
25 जून को ग्रीस में हुए आम चुनावों में एक बार फिर से दक्षिणपंथी पार्टी न्यू डेमोक्रेसी के किरियोकोस मित्सोटाकिस प्रधानमंत्री के रूप में चुने गये हैं। वामपंथी पार्टी कहलान
रूस में निजी भाड़े की सेना वाली कम्पनी वैगनर के मालिक प्रिगोजिन ने विद्रोह कर दिया और 24 घण्टे के बाद उसने विद्रोह से पांव पीछे खींच लिया। उसकी भाड़े की सेना ने रूस के दक्ष
तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।