युद्ध

युद्ध और युद्ध का कारोबार

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आधुनिक जमाने में यह आम परिघटना रही है कि युद्धों से यदि आम जनता की तबाही हुई है तो इससे पूंजीपतियों ने खूब मुनाफा भी कमाया है। यह सभी देशों में होता रहा है। भारत में देशी

नूरा-कुश्ती में कौन जीता?

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आपातकाल के ठीक पहले अमृत नाहटा ने एक फिल्म बनायी थी- ‘किस्सा कुर्सी का’। इस फिल्म को सेंसर बोर्ड द्वारा अनुमति नहीं मिली। कहा जाता है कि आपातकाल के दौरान संजय गांधी ने इस

यमन में अमेरिकी बमबारी

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28 अप्रैल को अमेरिकी हवाई हमलों का निशाना यमन के सादा प्रांत का प्रवासी बंदी गृह बना। इस हमले में 68 लोग मारे गये। इस बंदी गृह में उत्तरी अफ्रीका से सऊदी अरब की ओर गैर का

युद्धों, नरसंहारों के बीच दुनिया में बदलते हालात

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रूस की सेनायें यूक्रेन में लगातार हमला करते हुए आगे बढ़ रही हैं। वे कुर्स्क और बोल्दगरोया में यूक्रेनी सेना को मुख्यतः पीछे धकेल चुकी हैं। अब वे यूक्रेन के सुमी, खारकोव और

गाजापट्टी में इजरायल द्वारा जारी नरसंहार और इजरायली सत्ता का संकट

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इजरायल की नेतन्याहू की सरकार ने युद्ध विराम को समाप्त करके गाजापट्टी में नरसंहार फिर से शुरू कर दिया है। उसने युद्ध विराम के पहले के समझौते को दूसरे चक्र में आगे बढ़ाने से

गाजापट्टी में युद्ध विराम क्या जारी रहेगा?

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अमरीकी राष्ट्रपति द्वारा गाजापट्टी से फिलिस्तीनियों को उजाड़कर कहीं दूसरे देशों में बसाने की योजना को पलीता लगने के बाद अब अमरीकी साम्राज्यवादी सीधे हमास के साथ वार्ता करन

अमरीका-यूक्रेन वार्ता से ठीक पहले रूस पर यूक्रेन के ड्रोन हमले

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यूक्रेन ने रूस के भीतर अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमले किये हैं। रूस का कहना है कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने 337 ड्रोनों को मार गिराया है। इसके बावजूद, राजधानी मास्को और

चूहा घुस गया बिल में

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बेचारे चूहे को हर समय खतरा रहता है। और जब उसे बहुत खतरा दिखायी देता है तो वह सीधे अपने बिल में घुस जाता है। डरा-सहमा चूहा जब अपने बिल में पहुंच जाता है तो उसे बड़ी राहत मि

माई लाई से गाजा तक साम्राज्यवादी अत्याचार

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अमेरिकी सेना लेफ्टिनेंट विलियम कैली जूनियर की अप्रैल 2024 में 80 वर्ष की आयु में मृत्यु हुई थी, वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी साम्राज्यवाद के सबसे कुख्यात अपराधों में से

इजरायल का ईरान पर हमला

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बीते दिनों इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला बोल दिया। मिसाइलों के जरिये लगभग दिन भर किये गये इस हमले में ईरान के 4 सैनिकों के मरने व सैन्य सामग्री के भारी नुकसान क

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।