बढ़ती महिला हिंसा के खिलाफ जंतर-मंतर पर आक्रोश प्रदर्शन

प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा देश में बढ़ती महिला हिंसा के खिलाफ राजधानी दिल्ली में 26 नवंबर को आक्रोश प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन में उत्तराखंड, यूपी, हरियाणा, दिल्ली से आई सैकड़ों महिलाओं ने भागीदारी की।
    
कार्यक्रम का संचालन प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की महासचिव रजनी जोशी और कार्यकारिणी सदस्य ऋचा ने किया।
    
जंतर-मंतर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने कहा कि 25 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाया जाता है। हमारे देश की सरकार ने भी महिला हिंसा उन्मूलन दिवस मनाया है लेकिन महिला हिंसा खत्म होने के बजाय बढ़ती जा रही है। औपचारिक तौर पर घोषणा करने मात्र से महिला हिंसा को खत्म नहीं किया जा सकता है। इसको सीधे तौर पर देखा जा सकता है कि देश में हर साल महिला हिंसा के आंकड़ों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है। बुजुर्ग महिलाओं से लेकर छोटी बच्चियों तक के लिए भारतीय समाज असुरक्षित बनता जा रहा है। कन्या भ्रूण हत्या, दहेज हत्या, घरेलू हिंसा, बलात्कार, छेड़छाड़ आदि तरीकों से महिलाएं निरंतर हिंसा की मार सह रही हैं।
    
महिला हिंसा की घटनाएं न केवल सार्वजनिक स्थलों पर हो रही हैं बल्कि घरों की चारदीवारी में, कार्यस्थलों पर, जातीय दंगों के दौरान और यहां तक कि खुद राज्य सत्ता भी महिलाओं के साथ हिंसा, यौन हिंसा की घटनाओं को अंजाम दे रही है।
    
वक्ताओं ने कहा कि बी एच यू जैसे कालेज परिसर में आई आई टी की छात्रा के साथ छेड़छाड़ व सामूहिक बलात्कार जैसी जघन्य घटना को अंजाम दिया गया। हाल ही में हुए मणिपुर दंगों में दो कुकी जाति की महिलाओं को नग्न कर सड़क पर दौड़ाया गया। गुजरात दंगों के दौरान बिल्किस बानो के साथ जैसी तमाम घटनाएं घटीं जिनमें मुस्लिम समुदाय के घरों में घुस कर मुस्लिम महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। उन महिलाओं की आंखों के सामने ही उनके छोटे-छोटे बच्चों को पत्थर पर पटक-पटक कर मार दिया गया। ऐसी ही पीड़ित महिला बिल्किस बानो ने काफी संघर्ष किया तब जाकर उसके 11 दोषियों को उम्र कैद की सजा मिली थी लेकिन 15 अगस्त 2022 में उन 11 अपराधियों को भाजपा सरकार ने रिहा कर दिया। इससे यह साबित होता है कि भाजपा सरकार महिलाओं के साथ अपराध करने वालों को बचाने का काम कर रही है।
    
वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सरकार अपने फासीवादी एजेंडे के तहत आम मेहनतकश जनता के जनवादी अधिकारों को सीमित करती जा रही है। उसी में वह महिलाओं के जनवादी अधिकारों को भी खत्म कर 150 साल पुरानी स्थिति में पहुंचा देना चाहते हैं।
    
वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सरकार एक तरफ तो महिला सशक्तिकरण की बड़ी-बड़ी बातें करती है लेकिन वहीं दूसरी तरफ महिला पहलवानों के साथ यौन उत्पीड़न करने वाले बृजभूषण शरण को सजा देने के बजाय उसको बचाने का काम कर रही है। इसी जंतर मंतर पर देश-दुनिया में नाम कमाने वाली महिला पहलवानों पर लाठी चार्ज करने, उनके धरने को खत्म करने का काम किया। जब देश का नाम ऊंचा करने वाली महिलाओं को न्याय नहीं मिल रहा है तो सोच सकते हैं कि आम मजदूर महिला को इस शासन में कैसे न्याय मिल पायेगा? 
    
वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार वैसे तो महिलाओं को आगे बढ़ाने के, उनको आत्मनिर्भर बनाने की बड़ी-बड़ी बातें करती है लेकिन स्कीम वर्कर (भोजनमाता, आंगनबाड़ी, आशा वर्कर आदि) को न्यूनतम मानदेय देकर उनका आर्थिक शोषण के साथ-साथ मानसिक उत्पीड़न भी किया जा रहा है।
    
वक्ताओं ने कहा कि महिला हिंसा को खत्म करने के लिए उसके कारणों को खत्म करने की जरूरत है। यानी घरेलू दासता, पुरानी सामंती मूल्य-मान्यताओं की दासता और उजरती दासता से जब तक महिलाओं को मुक्त नहीं किया जाएगा तब तक महिला हिंसा को भी खत्म नहीं किया जा सकता है। 
    
अंत में आह्वान करते हुए कहा गया कि समाज के मजदूरों-मेहनतकशों को एकजुट होकर इस पूंजीवादी व्यवस्था का खात्मा कर एक नए समाज समाजवाद के लिए संघर्ष को तेज करने की जरूरत है।
    
कार्यक्रम में बेलसोनिका यूनियन (गुड़गांव), भेल मजदूर ट्रेड यूनियन, सीमेंस वर्कर्स यूनियन, एवरेडी मजदूर यूनियन (हरिद्वार), इंटरार्क मजदूर संगठन (रुद्रपुर), इफ्टू (सर्वहारा), जन संघर्ष मंच (हरियाणा), गार्गी चेतना मंच, मजदूर सहयोग केंद्र विमुक्तता स्त्री मुक्ति संगठन, एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक राइट्स, मजदूर पत्रिका, संग्रामी घरेलू कामगार यूनियन, ठेका मजदूर कल्याण समिति, पतनगर, मजदूर सहायता समिति, इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन आदि संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अपने वक्तव्य रखे और कार्यक्रम का समर्थन किया।                 --दिल्ली संवाददाता
 

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