भेड़िया गया, रंगा सियार आ गया

Published
Sat, 08/01/2026 - 15:50
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शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को मजबूरन इस्तीफा देना ही पड़ा। हालांकि श्रीमान जी ने अपने इस्तीफे को बहुत महान उद्देश्यों का वास्ता देते हुए दिया। साफ है, श्रीमान जी बलि का बकरा बनने के स्थान पर शहादत का चोला पहनने का स्वांग रच रहे हैं। श्रीमान जी पुराने संघी हैं। यानी जब अभी दूध के दांत टूटे भी नहीं थे तब से वे गोडसे पाठशाला में पढ़ रहे थे। श्रीमान जी का दुर्भाग्य देखिये कभी पेपर लीक का मुद्दा उठाकर अपने राजनैतिक कैरियर को परवान चढ़ाने वाले के राजनैतिक कैरियर की बलि पेपर लीक के मामले ने ही ले ली। खैर! अब तो श्रीमान जी गये पर जल्द ही किसी नये अवतार में दिखेंगे। 
    
प्रधान की जगह जोशी जी आ गये हैं। भेड़िया गया तो रंगा सियार आ गया। सियार ने भेड़िये की खूब तारीफ की। ‘नई शिक्षा नीति’ जो छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों का खून पी रही है; जो नफरत के एजेण्डे को आगे बढ़ा रही है, की नये शिक्षा मंत्री ने खूब तारीफ की। और प्रधान जी के इस योगदान को याद किया कि उन्होंने क्या बढ़िया काम- नई शिक्षा नीति के जरिये- किया। 
     
जोशी जी का भी बचपन, युवावस्था, राजनैतिक कैरियर आदि का रिकार्ड प्रधान सरीखा ही है। इन्होंने अपना राजनैतिक कैरियर कर्नाटक के हुबली में ईदगाह मैदान मे जबरदस्ती तिरंगा फहराने से शुरू किया। श्रीमान जी अपने संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय में तिरंगा फहराने का दुस्साहस तो कभी नहीं कर सके पर ईदगाह में तिरंगा फहराकर जरूर तीस मार खां बन गये। 
    
धर्मेन्द्र प्रधान जी भी करोड़ों रुपये की चल-अचल सम्पत्ति के मालिक हैं तो नये शिक्षा मंत्री उनसे इस मामले में और भी ज्यादा धनवान हैं। प्रधान जी कैसे शिक्षा मंत्री थे कि उनकी अपनी बेटी अमेरिका में पढ़ती है। बेचारे जोशी के बच्चों के बारे में कुछ दिनों बाद ‘काकरोच जनता पार्टी’ वाले बतायेंगे। बाकी कुछ दिनों बाद सबको साफ हो जायेगा कि रंगा सियार भी भेड़िया जितना ही इंसानी लहू का प्यासा है। जिन नीट अभ्यर्थियों ने आत्महत्याा की है उनकी आत्मा शायद यही कह रही होगी।  

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