भोजनमाताओं का 2 फरवरी 2026 को हड़ताल का ऐलान

Published
Fri, 01/16/2026 - 07:20
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उत्तराखण्ड में भोजनमाताएं लंबे समय से न्यूनतम वेतन व स्थाई रोजगार के लिए संघर्ष कर रही हैं। लेकिन उत्तराखंड सरकार भोजनमाताओं की मांगों को लगातार अनसुनी कर रही है। इसलिए प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के बैनर तले 12 जनवरी 2026 को भोजनमाताओं ने हरिद्वार और भीमताल में जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन दिया गया। हरिद्वार में विकास भवन रोशनाबाद पर एकत्र हो सभा की गई; उसके बाद जुलूस निकालकर जिला शिक्षा अधिकारी को हड़ताल का ज्ञापन दिया गया। ऐसे ही भीमताल में खुटानी चौराहे पर एकत्र होकर शिक्षा भवन तक जुलूस निकाला गया और शिक्षा अधिकारी को हड़ताल का ज्ञापन दिया।
    
सभा में वक्ताओं ने कहा कि भोजनमाताएं 20-21 सालों से सरकारी, अर्ध सरकारी विद्यालयों में भोजन बनाने का काम कर रही हैं। परंतु, अत्यंत खेद की बात है कि इतने वर्ष कार्य करने के बाद भी उनकी स्थिति आज भी अत्यंत असुरक्षित, अस्थिर एवं उपेक्षित बनी हुई है। मुख्यमंत्री के सामने भोजनमाताएं अपनी समस्याएं एवं मांग अलग-अलग वक्त पर रखती रही हैं। मगर अफसोस है कि उनकी मांगों को लगातार अनसुना किया जा रहा है। 
    
वक्ताओं ने कहा कि भोजनमाताओं से स्कूलों में 4-4 कर्मचारियों (माली, सफाई कर्मचारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और भोजनमाता) के बराबर काम कराया जा रहा है। इतने पर भी कभी बच्चे कम होने के नाम पर, तो कभी भोजनमाताओं के बच्चे स्कूल में नहीं पढ़ने के फर्जी तर्क पर, तो कभी स्कूलों के विलयीकरण के नाम पर उन्हें नौकरी से निकाला जा रहा है या नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। जिसके कारण भोजनमाताओं का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है।
    
वक्ताओं ने कहा कि भोजनमाताओं का वेतन पिछले 4 सालों से 3000 रु. पर ही अटका हुआ है। यह राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन के एक तिहाई से भी कम है। इस बीच राज्य सरकार ने 25 प्रतिशत न्यूनतम वेतन बढ़ाया हैं मगर भोजनमाताओं की स्थिति को सरकार ने कतई संज्ञान में नहीं लिया है। उत्तराखंड सरकार ने भोजन ‘‘माता’’ शब्द दिया और ‘‘माता’’ शब्द के ‘‘सम्मान’’ के नाम पर उत्तराखंड सरकार भोजनमाताओं का शोषण-उत्पीड़न कर रही है।
    
सभा में वक्ताओं ने कहा कि भोजनमाताओं के तमाम संघर्षों के बाद भी सरकार उनकी मांगों को लगातार अनसुना कर रही है। भोजनमाताओं ने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए 2-3 जून को देहरादून में दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया था, उत्तराखंड सरकार के सामने अपनी समस्याओं को रखा था। लेकिन सरकार ने केवल मौखिक आश्वासन देकर अभी तक समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया है। इसलिए अब भोजनमाताएं मजबूर होकर 2 फरवरी 2026 को हड़ताल (खाना बनाना बंद) करेंगी। जिसकी पूरी जिम्मेदारी उत्तराखण्ड सरकार और शासन-प्रशासन की होगी।
    
कार्यक्रम में हरिद्वार जिले के 6 ब्लाकों की और मुक्तेश्वर, रामगढ़, गरमपानी, बेतालघाट, नैनीताल, भीमताल, हल्द्वानी, लालकुआं, पंतनगर, रामनगर की भोजनमाताएं शामिल रहीं। इसके अलावा प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, इंकलाबी मजदूर केन्द्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के  कार्यकर्ता मौजूद रहे।            -विशेष संवाददाता
 

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