बुलडोजर कार्यवाही व सत्यापन अभियान रोकने को सत्याग्रह

/buldozer-karyvahi-v-satyapan-abhiyaan-rokane-ko-satyagrah

हल्द्वानी/ बुद्ध पार्क में 10 अगस्त 25 को कई संगठनों द्वारा सभा की गयी। सभा का मुख्य उद्देश्य बुलडोजर कार्रवाई व कथित सत्यापन के नाम पर हो रहे अधिकारों के हनन के विरोध में सत्याग्रह कार्यक्रम का आयोजन था। 
    
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जन्म से लेकर मृत्यु तक लिंग, जाति, धर्म, पंथ, स्थान, भाषा या आर्थिक आधार पर भेदभाव के बिना गरिमा पूर्ण व सम्मानजनक जीवन जीना हर मनुष्य का मूल अधिकार है। 
    
वैध-अवैध के नाम पर बुलडोजर कार्यवाही व अपराध रोकने के नाम पर अपने ही देश के नागरिकों के कथित सत्यापन अभियान ने देश के वंचित, सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए जीवन यापन का संकट पैदा कर दिया है। इन सबको सम्मानजनक जीवन यापन सुविधा उपलब्ध कराने के विपरीत उनकी अपनी मेहनत से जुटायी सुविधाओं को भी ध्वस्त किया जा रहा है। साम्प्रदायिक जातिगत सोच के तहत चलाये जा रहे अभियान ने देश में गरीब व वंचित तबके के अधिकारों को जबरदस्त चोट पहुंचायी है। 

हमारा संविधान हर नागरिक को जिस मानवीय गरिमा व अधिकारों की औपचारिक गारंटी देता है उस पर गम्भीर सवाल खड़े हो गये हैं। प्रदेश व पूरे देश में आर्थिक सामाजिक रूप से कमजोर व अन्य वर्गों के अधिकारों पर हो रहे हमलों के विरोध व संविधान द्वारा दिये गये अधिकारों की रक्षा के लिए लोग सत्याग्रह हेतु मजबूर हो गये हैं। 
    
सभा में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि व शहर के तमाम जागरूक लोग उपस्थित थे। 
        -हल्द्वानी संवाददाता

आलेख

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।