धर्म और राजनीति का गठजोड़

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धर्म जब राजनीति का घातक औजार बन जाये
धार्मिक कर्म शिक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाये
आस्था के नाम पर गुंडागर्दी जायज बन जाये
धर्म के जयकारे किसी के लिए खौफ का सबब बन जाये
तब समझ लेना कि कौम विकास नहीं विनाश के रास्ते पर है।

जब एक धर्म विशेष पर पूरी व्यवस्था
मेहरबान हो जाये
कानफोड़ू डीजे धर्म और शांति के प्रतीक
और शोर शराबा अजान हो जाये
किसी के लिए घर की छत पर नमाज पढ़ना भी गुनाह
और किसी के लिए हाईवे तक जाम हो जाये
तब समझ लेना हम सेकुलर राष्ट्र नहीं
किसी धार्मिक गिरोह के चंगुल में कैद हैं।

जब शासन प्रशासन किसी धर्म के
चरणों में नतमस्तक हो जाय
न्यायालय के जज धर्मसंगत में प्रवचन करने लग जाये
जहां कविता पढ़ने पर मुकदमा दर्ज हो जाये
संविधान को जेब में रखकर बुलडोजर चलने लग जाये
तब समझ लेना कि हम किसी लोकतंत्र में नहीं तानाशाही के दलदल में फंसते जा रहे हैं।

इधर धर्म के नाम पर
दंगा फसाद की पूरी छूट है
उधर संस्थानों में
श्रम की अंधी लूट है
कांवड़ उठाओगे तो
फूल बरसायेंगे, पैर भी दबायेंगे
शिक्षा और नौकरी की बात करोगे
तो लट्ठ तोड़े जायेंगे
जो वो कहें उसे चुपचाप मान लो
विरोध की आवाज निकाली
तो सीधे अंदर जायेंगे।। 
            -भारत सिंह, आंवला

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