छत्तीसगढ़, राजस्थान, म.प्र. - किसानों को उजाड़ती सरकार
आजकल मोदी सरकार घमंड में चूर है। 2024 के आम चुनाव की बुरी गत से उबर कर वह अपने को अजेय समझने लगी है। इसीलिए वह मजदूरों-किसानों पर रोज नये-नये हमले बोलकर पूंजीपतियों का मु
आजकल मोदी सरकार घमंड में चूर है। 2024 के आम चुनाव की बुरी गत से उबर कर वह अपने को अजेय समझने लगी है। इसीलिए वह मजदूरों-किसानों पर रोज नये-नये हमले बोलकर पूंजीपतियों का मु
गुड़गांव/ दिनांक 4 दिसम्बर 2025 को बेलसोनिका यूनियन व इंकलाबी मजदूर केन्द्र ने गुरूग्राम श्रम न्यायालय द्वारा दिये गये फैसलों के विरोध में लघु सचिवालय गुर
रामनगर/ उत्तराखंड में रामनगर के वन ग्राम पूछडी में 7 दिसम्बर को सरकार ने बुल्डोजर चलाकर 60 से अधिक गरीब मेहनतकशों के घरों को मटियामेट कर डाला। वन विभाग औ
चीन में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के सत्तावादी शासन के तहत कामगारों को संगठित होने और सामूहिक शक्ति के रूप में कार्य करने का अधिकार नहीं है, और उनके संघर्षों को अक्
मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (MASA), जो देश भर के 14 जुझारू मजदूर संगठनों, यूनियनों और फेडरेशन का एक समन्वय मंच है, ने हाल में लागू किए गए नए मजदूर-विरोधी 4 लेबर कोड के खिल
हरिद्वार/ किर्बी श्रमिक कमेटी द्वारा पूर्व में घोषित कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 21 नवंबर और 28 नवंबर को प्रातः 10 बजे चिन्मय डिग्री कालेज से पूरे सिडकुल
बेल्जियम की एरिजोना सरकार मजदूर वर्ग पर नये हमले बोल रही है। एक ओर सरकार सैन्यीकरण पर खर्च बढ़ा रही है तो दूसरी ओर मजदूरों-कर्मचारियों के पेंशन, वेतन पर हमले के साथ सार्वज
मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मजदूर विरोधी चार नये लेबर कोड्स लागू किये
देहरादून/ उत्तराखंड में उपनल (उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड) के 22,000 से अधिक संविदा कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण और समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इस बीच अलग-अलग वक
रामनगर/ उत्तराखंड में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मर्जर के नाम पर स्कूलों को बंद करने के विरोध में रामनगर में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा विरोध प्रद
अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।
शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।
जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है
हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।