मजदूर संघर्ष

बिन्दुखत्ता बचाने व राजस्व ग्राम बनाने को संघर्ष

लालकुंआ/ नगीना कालोनी उजाड़ने के बाद बिन्दुखत्ता का नाम अतिक्रमण की सूची में आने से बीते दिनों बिन्दुखत्ता की जनता काफी आक्रोशित हो गई। नैनीताल जिले की इस सूची में लालकुंआ के बंगाली

बकाया वेतन भुगतान हेतु बिजली संविदाकर्मियों का धरना

कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन के कर्मचारियों का 15 दिन लंबा धरना चला था। इस धरने में इंजीनियर से लेकर मजदूर तक सब शामिल थे। इसमें स्थायी कर्मचारी से लेकर संविदा/निविदा पर काम करने वाले क

बेलसोनिका के मजदूरों का संघर्ष लगातार जारी

गुड़गांव, आईएमटी मानेसर/ बेलसोनिका प्रबंधन के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर बेलसोनिका यूनियन का संघर्ष लगातार जारी है। बेलसोनिका मजदूर दिनांक 4 मई 2023 से कंपनी गेट के बाहर बेलसोनिका यू

रोमानिया : वेतन वृद्धि के लिए शिक्षकों का संघर्ष

रोमानिया के लगभग 2 लाख शिक्षकों में करीब 1.5 लाख शिक्षक 22 मई से हड़ताल पर हैं। उनके साथ में स्कूलों के 70,000 सहयोगी स्टाफ भी हड़ताल पर हैं। इतनी वृहद हड़ताल बीते 18 वर्षों में पहली बार हुई है। इस हड़

रामनगर में सरकार के बुल्डोजर का खौफ कायमः जन प्रतिरोध जारी

रामनगर/ रामनगर में वन भूमि पर अतिक्रमण के नाम पर लोगों के आशियाने उजाड़ने एवं धार्मिक स्थलों को तोड़ने की सरकार की कोशिशों के ग्रामीणों द्वारा जबरदस्त प्रतिरोध के परिणामस्वरूप वन विभ

रेलवे-केंद्र सरकार, उत्तराखंड सरकार-स्थानीय प्रशासन और न्यायालय की बेरुखी की भेंट चढ़ी नगीना कालोनी

लालकुआं/ 18 मई 2023 को रेलवे प्रशासन ने स्थानीय पुलिस-प्रशासन के साथ मिलकर लालकुआं, उत्तराखंड की नगीना कालोनी को जमींदोज करना शुरू कर दिया। तोड़-फोड़ की यह प्रक्रिया रेलवे द्वारा पूर

प्रोटेरियल (हिताची) के मजदूरों को मिली आंशिक सफलता

गुड़गांव/ 12 मई को प्रोटेरियल यानी हिताची के मजदूरों का प्रबंधन के साथ समझौता होने के साथ ही उनका संघर्ष फिलहाल खत्म हो गया है। प्रोटेरियल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड मानेसर यानी हिताची

मई दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

एक मईः अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस- मजदूरों के संघर्षों का प्रतीक दिवस है, जो कि पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिन शिकागो के अमर शहीदों -अल्बर्ट पार्सन्स, आगस्त स्पाइस, एडोल्फ फिशर और जार्ज एंजिल

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

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भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।