मॉब लिंचिंग का संगठित गिरोह

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आजकल बांग्लादेश में हिन्दू युवक की मॉब लिंचिंग पर संघी संगठन-पूंजीवादी मीडिया सबने हंगामा कर रखा है। जब यह हंगामा चल ही रहा था उसी दौरान भारत में 3 युवकों की मॉब लिंचिंग कर हत्या कर दी गयी। तीनों हत्याओं को संघ परिवार से जुड़े या उनकी सोच से ओत प्रोत लोगों ने अंजाम दिया। तीनों हत्याओं में मारे जाने वालों में 2 हिन्दू व 1 मुसलमान थे। जाहिर है हिंदू रक्षा का दावा करने वाला संघ परिवार अब हिन्दुओं की हत्या से भी गुरेज नहीं कर रहा है। 
    
उत्तराखण्ड में त्रिपुरा में रहने वाले 17 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की हत्या उसे चीनी कहते हुए की गयी। 9 दिसम्बर को उस पर हमलावरों ने बाजार में जाति सूचक शब्दों के साथ हमला किया। उसकी मौत 25 दिसम्बर को अस्पताल में इलाज के दौरान हो गयी। केरल में पलक्कड़ जिले में छत्तीसगढ़ के प्रवासी मजदूर रामनारायन बघेल की हत्या बांग्लादेशी घुसपैठिया कह कर संघी लम्पटों द्वारा कर दी गयी। उड़ीसा के संबलपुर में 24 दिसम्बर को 30 वर्षीय पं.बंगाल के निवासी श्रमिक जुएल शेख की हत्या भी बांग्लादेशी घुसपैठिया करार देते हुए हमलावरों ने कर दी। 
    
जहां केरल में हत्यारे सीधे संघ-भाजपा से जुड़े पाये गये वहीं अन्य घटनाओं में हत्यारे उनकी सोच से प्रेरित बताये जा रहे हैं। पिछले दिनों बांग्लादेशी घुसपैठिया का हल्ला काट कर पूरे देश में जगह-जगह गरीब बांग्लाभाषी लोगों की जांच करना, उन्हें प्रताड़ित करना संघ-भाजपा सरकार व प्रशासन ने अपना प्रमुख एजेण्डा बना लिया है। घुसपैठ की झूठी कहानियां गढ़ कर पूंजीवादी मीडिया इनके सुर में सुर मिला रहा है। ऐसे में संघी लम्पट कार्यकर्ता ही नहीं इनसे प्रभावित आम युवा भी खुद पुलिसिया भूमिका में उतर बांग्लाभाषी लोगों को प्रताड़ित करने लगे हैं। कभी-कभी यह प्रताड़ना आगे बढ़कर मॉब लिंचिंग में भी बदल जा रही है। 
    
बांग्लाभाषी लोग ही नहीं, देश में मुसलमान, ईसाई, उत्तर-पूर्व के लोग, कश्मीरी भी इनके निशाने पर हैं। बीते दिनों उत्तराखण्ड के काशीपुर में बजरंग दल के लोगों ने कश्मीरी शाल विक्रेता मुसमलान व्यक्ति की भारत माता की जय का नारा लगाने का दबाव डाल कर पिटाई कर दी। ऐसी घटनायें ये समूचे देश में अंजाम दे रहे हैं। ये घटनायें अंजाम देकर ये खुद को हिन्दू धर्म का रक्षक समझ रहे हैं।         
क्रिसमस पर पूरे देश में संघी लम्पटों द्वारा जगह-जगह हमला बोला गया। ढेरों जगह इन्होंने चर्चों के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया तो ढेरों कार्यक्रम इन्होंने रद्द कराये। तोड़-फोड़ के तो मानो ये चैम्पियन बन कर उभरे। इन तथाकथित हिन्दू रक्षकों को अब देश में अन्य धर्मों का कोई त्योहार भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है।  
    
यह संघ-भाजपा की जहरीली फासीवादी हिन्दुत्व की विचारधारा ही है जो इनके संगठन के कार्यकर्ताओं में इतनी नफरत पैदा कर दे रही है कि ये अपने ही देश के लोगों की मॉब लिंचिंग पर उतारू हो जा रहे हैं। सरकार-प्रशासन का इन लम्पटों को आज खुला संरक्षण किसी से छिपा नहीं है। अक्सर ऐसा हमला करने वाले संघ परिवार से प्रतिष्ठा व सम्मान के पात्र बनते रहे हैं। उनका फूलमालाओं से स्वागत किया जाता रहा है। इस तरह इस तरीके की घटनायें इनके राजनैतिक कैरियर चमकाने का भी जरिया बन जा रही हैं। 
    
स्पष्ट ही है कि इन हमलों के शिकार होने वाले बेहद गरीब कामगार ही होते हैं जो रोजी-रोटी की तलाश में एक प्रांत से दूसरे प्रांत में गये होते हैं और संघ परिवार के हमलों का शिकार हो जाते रहे हैं। अप्रवासी होने के चलते स्थानीय आबादी से ये ज्यादा घुले मिले भी नहीं होते और इनकी मौत पर ज्यादा हल्ला भी नहीं कटता है। पूंजीवादी मीडिया में भी ये बांग्लादेश की मॉब लिंचिंग की तरह सुर्खियां नहीं पाते हैं। 
    
मोदी-भागवत आज मंचों से चाहे जितनी समावेशी बातें करें, हकीकत यही है कि मॉब लिंचिंग संघ परिवार की राजनीति का महत्वपूर्ण अंग बन चुका है। इसके जरिये हिन्दू वोटों के ध्रुवीकरण, घुसपैठ का फर्जी प्रचार बल पाता है इसलिए मॉब लिंचिंग, सड़कों पर राह चलते लोगों की पिटाई, किसी की भी आई डी मांग कर तंग करना, किसी से भी भारत माता का नारा लगवाना संघी लम्पट गिरोह के कारकूनों का रोजाना का कर्म बन चुका है। देश में कोई दिन ऐसा नहीं गुजर रहा है जब इनके तांडव की कोई घटना न घट रही हो। संघ परिवार आज मॉब लिंचिंग का संगठित गिरोह बन चुका है। इस संगठित गिरोह से मेहनतकश जनता संगठित तरीके से ही निपट सकती है। 
    
जरूरी है कि इस हकीकत को जन-जन तक प्रचारित किया जाये कि बड़े पूंजीपति वर्ग-संघ का गठजोड़ खुले-छिपे दोनों तरीकों से मजदूर-मेहनतकश जनता को निचोड़ रहा है। पूंजीपति वर्ग जहां श्रम कानूनों में बदलाव का लाभ उठा, महंगाई के बावजूद वेतन न बढ़ा लोगों को तंगहाली में ढकेल रहा है वहीं संघी गिरोह अप्रवासी, घुसपैठिया, देशद्रोही के तमगे बांट सारी आजादी ही नहीं जान भी छीन ले रहा है। इनके फासीवादी हमलों के निशाने का दायरा अब मुसलमानों-ईसाईयों से आगे बढ़ कर आम अप्रवासी हिन्दू भी बनने लगे हैं और आने वाले वक्त में हर कोई आम जन इनके निशाने पर होगा। जरूरत है कि हिटलर के इन वंशजों को वक्त रहते ठिकाने लगाया जाये। पिछली सदी में मेहनतकश जनता ने हिटलर को सबक सिखाया था। इस सदी में भी उसे हिटलर के वारिसों से निपटना है। 

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