राजनीति

देखो ! भइया यह परिवारवाद नहीं है

रिलायंस समूह प्रमुख मुकेश अम्बानी ने अपने तीनों बच्चों आकाश अम्बानी, अनंत अम्बानी व ईशा अम्बानी को रिलायंस इण्डस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक मण्डल में शामिल करवा दिया। उनकी ब

अविश्वास प्रस्ताव : बहुमत को नहीं दोष गोसाईं

पूंजीवादी राजनीति में जब थोक के भाव विधायक-सांसद खरीदे जाने लगे, तो मुद्दा-आधारित अविश्वास प्रस्ताव के दौरान किसी विचारोत्तेजक बहस की अपेक्षा नहीं की जा सकती। आठ अगस्त से

लंपट बाबा की शरण में कांग्रेसी

खबर है कि कांग्रेस पार्टी के नेता कमलनाथ नये-नये चमके या चमकाये गये लंपट बाबा के दरबार में हाजिरी लगा आये हैं। कमलनाथ मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े नेता हैं

तीन दिन क्या खूब तमाशा रहा !

तीन दिन तक लोकसभा में मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस चलती रही। अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो जायेगा, इसकी खबर हर किसी को थी। फिर भी लोकसभा में आकाश-पाताल एक कर

प्रवर्तन निदेशालय निदेशक के गैर कानूनी सेवा विस्तार पर रोक

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के सेवा विस्तार पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी। 11 जुलाई को दिए अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने संजय मिश्रा के

ज्योति मौर्या की निजी जिन्दगी और समाज

उत्तर प्रदेश में एक चतुर्थ श्रेणी सरकारी कर्मचारी ने अपनी मेधावी पत्नी को प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए इलाहाबाद (प्रयागराज) की किसी अच्छी कोचिंग में तैयारी क

कोटा में अपनी जान लेते छात्र

राजस्थान का कोटा शहर एक बार फिर आत्महत्याओं के कारण सुर्खियों में है। इस वर्ष अभी तक 18 छात्र मौत को गले लगा चुके हैं। बताया तो यह भी जा रहा है कि आत्महत्याओं की संख्या व

लंगड़ी खाकर शरद पवार धड़ाम

भाजपा बहुत दिनों से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा या एनसीपी) को तोड़कर अपने खेमे में पहले तो पूरी पार्टी पर कम से कम उसके एक गुट को लाना चाहती थी। पिछले दिनों वह अप

आलेख

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जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

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लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?

/iran-par-mandarate-yuddha-ke-badal

इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं

/prashant-bhushan-ka-afsos-and-left-liberal-ka-political-divaliyapan

गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि