सूरत के संघर्षरत मजदूरों के समर्थन में प्रदर्शन

Published
Tue, 09/01/2026 - 15:50
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हरिद्वार/ 20 अगस्त 2026 को चिन्मय डिग्री कालेज के निकट विभिन्न संगठनों द्वारा गुजरात के सूरत में संघर्षरत मजदूरों पर पुलिस प्रशासन व गुंड़ों द्वारा बर्बर लाठीचार्ज व फर्जी मुकदमे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया।
    
गुजरात के सूरत में अमरौली वेदांत इंडस्ट्रियल एरिया में टैक्सटाइल से जुड़ी फैक्टरी के मजदूर बुरी कार्यपरस्थितियों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। मजदूरों की मांग है कि साप्ताहिक अवकाश दिया जाये, वेतन बढ़ोत्तरी, ओवरटाइम का डबल भुगतान और बोनस आदि दिया जाय। इन मांगों को लेकर एक हफ्ते से मजदूर आंदोलित हैं। शासन-प्रशासन और फैक्टरी मालिक मांगों को सुनने के बजाय दमन करने पर उतारू हैं। पुलिस और फैक्टरी मालिकों के गुंड़ों द्वारा मजदूरों को मारा-पीटा जा रहा है। संघर्षरत मजदूरों पर फर्जी दंगा भड़काने को लेकर 26 मजदूरों को गिरफ्तार किया गया है और 250 अज्ञात मजदूरों पर फर्जी मुकदमे लगाये गये हैं, जो बहुत ही निंदनीय है।     
    
इंकलाबी मजदूर केंद्र व संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा हरिद्वार ने गुजरात सरकार की इस दमनात्मक कार्यवाई की भत्र्सना की तथा गुजरात सरकार से मांग की है कि मजदूरों की जायज मांगों को पूरा किया जाये, गिरफ्तार मजदूरों को रिहा किया जाय तथा फर्जी मुकदमे रद्द किये जायें।
    
विरोध प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों का शोषण-उत्पीड़न लगातार बढ़ता जा रहा है। भाजपा हो चाहे अन्य राजनीतिक दलों की सरकार; हर जगह मजदूरों के अधिकार कुचले जा रहे हैं। 
    
गुजरात में लगभग 30 सालों से भाजपा का शासन है। वहां पर तो फैक्टरियों में श्रम कानूनों का नामो निशान नहीं है। 12-14 घंटे बिना अवकाश के काम करने पर मजदूर मजबूर हैं। और ऊपर से मोदी सरकार द्वारा 4 मजदूर विरोधी लेबर कोड्स लागू कर मजदूरों को गुलाम बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है। लेकिन 2026 के फरवरी माह से मजदूरों ने अपने हक-अधिकारों को लेकर संघर्ष करना शुरू किया हुआ है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड तथा कर्नाटक व तेलंगाना की सरकारों को वेतन वृद्धि करनी पड़ी। विगत पांच छः माह में पानीपत, गुड़गांव, मानेसर, नोएडा, हरिद्वार, रुद्रपुर, सैलाकुई (देहरादून) और राजस्थान व पंजाब आदि अलग-अलग राज्यों में यह ठेका मजदूरों का आंदोलन फैलता रहा है जो अभी भी किन्हीं रूपों में जारी है। इन आंदोलनों को दबाने के लिए राज्य व केन्द्र सरकार तथा स्थानीय शासन-प्रशासन लगा हुआ है। पूंजीवादी मीडिया आंदोलनों को बदनाम करने के लिए पाकिस्तानी, नक्सली और बाहरी असमाजिक तत्व कह कर गुमराह करने पर लगा हुआ है। लेकिन मजदूर उनके झांसे में नहीं आ रहे हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से मांगों को रख रहे हैं।
    
आज जरूरत है कि मजदूरों के बुनियादी मुद्दों को उठाते हुए संघर्ष को तेज किया जाए और मजदूरों को क्रांतिकारी आंदोलन के लिए संगठित किया जाये।
    
विरोध प्रदर्शन में इंकलाबी मजदूर केन्द्र और संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा हरिद्वार के घटक भेल मजदूर ट्रेड यूनियन, फूड्स श्रमिक यूनियन, देव भूमि श्रमिक संगठन, सीमेंस वर्कस यूनियन (सी एंड एस) व किर्बी श्रमिक कमेटी आदि के प्रतिनिधि और मजदूर शामिल रहे। 
        -हरिद्वार संवाददाता 

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