पत्र
बड़े शहरों की पहचान: कूड़े के पहाड़
आजकल कोई चीज अगर सर्वव्याप्त है तो वह है कूड़े के ढेर। कूड़े के ढेर का कोई इतिहास तो मिलता नहीं। ये तो आधुनिक विकसित सभ्यता में ही पैदा हुआ है। सिन्धु घाटी सभ्यता बहुत विकस
जेन जी बनेगी गो मित्र
जंतर-मंतर संघर्ष से जेन-जी के भाजपा से दूर जाने का खौफ संघ-भाजपा के नेताओं के चेहरों पर नजर आने लगा है। जेन-जी के महत्व को संघी अच्छे से जानते हैं। वे जानते हैं कि अगर नई
नीयत
अरे मुल्ला जी आज सावन का पहला सोमवार है थोड़ा लगा लो, कहते हुए पंडित जी ने तम्बाकू भरी चिलम नजाकत अली की तरफ बढ़ाई। मशीन की आड़ का अंधेरा चिलम में उठने वाली लपट में चमक उठा
जेन जी के बाद जेन अल्फा
पिछले दिनों जंतर मंतर पर जेन जी का विरोध प्रदर्शन हुआ। जेन जी की मांग पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की थी। शुरूआत में तो मोदी सरकार और लगु
नई राह दिखलाते बच्चे
अंधेरे के घटाटोप में
प्रचार तंत्र की लहालोट में
लोकतंत्र पर पड़ी चोट में
दीपक एक जलाते बच्चे
जग का तिमिर मिटाते बच्चे
नई राह दिखलाते बच्चे
मकरूह
‘‘गत्ते बिछा लो खाना खा लेते हैं।’’ राम मोहन ने साथ में काम कर रहे लड़कों को संबोधित करते हुए कहा। रात के नौ बज चुके हैं। सभी लड़के लेथ मशीन में अपने-अपने काम पर लगे हुए है
जैन मंदिर में काम करने वाले मजदूर से बातचीत
प्र.- कमल भाई आप कहां काम करते हैं?
उ.- मैं एक जैन मंदिर में काम करता हूं।
वर्तमान आंदोलन और न्यायपालिका
जब भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लोगों ने देखा कि बिना नेम प्लेट पुलिस वाले, सादी वर्दी में तैनात गुंडे-लाठी डंडे लिए हुए नियम विरुद्ध पुलिस के साथ खड़े थे और लड़कियों और लड़क
जानवर और इंसान
वैसे तो खाली समय कब होता है लेकिन जब कोई जानवर बन्दर, घोड़ा, ऊंट आदि दो पैरों पर चलने की कोशिश करता है तो थोड़ी बहुत हंसी आ ही जाती है। यह शायद इसलिए होता हो कि कुछ लोग दो
राष्ट्रीय
आलेख
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।