स्कूलों के मर्जर के विरोध में संघर्ष
बरेली/ उत्तर प्रदेश सरकार कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के करीब 27,000 सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों को मर्ज (विलय) करने की तैयारी कर रही है। पहले चरण में 50
बरेली/ उत्तर प्रदेश सरकार कक्षा 1 से कक्षा 8 तक के करीब 27,000 सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों को मर्ज (विलय) करने की तैयारी कर रही है। पहले चरण में 50
केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशनों द्वारा मोदी सरकार की मजदूर-मेहनतकश जन विरोधी नीतियों के विरोध में 9 जुलाई को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया गया था। संघर्षशील मजदूर संग
फरीदाबाद/ 17 जून 2025 को लखानी चौक पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा अमेरिका व इजरायल के युद्ध परस्त गठजोड़ द्वारा ईरान पर हमले के खिलाफ उनका पुतला दहन किया
पंतनगर/ दिनांक 18 जून 2025 को ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर द्वारा कुलपति पंतनगर वि.वि.
हल्द्वानी/ बनभूलपुरा बस्ती को रेलवे द्वारा अतिक्रमण बताए जाने के विरोध में कई स्तर पर संघर्ष चलता रहा है। इसमें ही बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के जरिये इसे स
गुड़गांव/ मानेसर मारूति में 18 जुलाई 2012 में हुए मारूति काण्ड के पीछे असल कारण यह था कि मारूति यूनियन ने ठेका प्रथा खत्म करने तथा सभी ठेका मजदूरों को स्थ
हरिद्वार/ सिडकुल में स्थित सी एंड एस इलेक्ट्रिक लिमिटेड हैवी पावर प्लांट के उत्पाद (स्विच, बिजली बोर्ड, आदि) बनाती है। 2006 में सी एंड एस का एक बीटी प्ला
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।