रिपोर्ट

बिजली के निजीकरण के खिलाफ साझा विरोध प्रदर्शन

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उत्तर प्रदेश सरकार बिजली के निजीकरण के लिए लगातार प्रयासरत है। विद्युतकर्मी लगातार इसके खिलाफ जगह-जगह संघर्ष कर रहे हैं। उनके संघर्ष के समर्थन में और बिजली के निजीकरण के

यूनियन द्वारा खुद पंजीकरण रद्द करने का आवेदन

धारूहेड़ा/ हरियाणा के धारूहेड़ा औद्योगिक इलाके में स्थित ऑटोफिट फैक्टरी में जारी छंटनी को प्रबंधन ने मई 2025 में अंतिम रूप देकर सभी स्थाई श्रमिकों को वी.आर

बढ़ते फासीवादी हमलों के विरोध में सेमिनार

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मऊ/ मऊ में 18 मई को ‘‘बढ़ता फासीवादी खतरा और संघर्ष की दिशा’’ विषय पर इंकलाबी मजदूर केन्द्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन व ग्रामीण मजदूर यूनियन की ओर से

मजदूर नेताओं पर फर्जी मुकदमों के खिलाफ संघर्ष

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हरिद्वार/ 20 मई 2025 को हरिद्वार (उत्तराखंड) पुलिस प्रशासन और एंकर पैनासोनिक प्रबंधन द्वारा 11 मजदूर नेताओं पर लगाए गए फर्जी मुकदमों के विरोध में इंकलाबी

बाबा रामदेव की पतंजलि में सफाई मजदूरों की 3 दिन की हड़ताल

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हरिद्वार/ पतंजलि फेस-1 तथा पतंजलि फेस-2 हरिद्वार-रुड़की राष्ट्रीय राज्य मार्ग पर स्थित है। आचार्य कुलम, वाल्मीकि आश्रम, यूनिवर्सिटी, कन्या गुरुकुलम, वानप्

भोजनमाताओं का अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन

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हल्द्वानी/ दिनांक 4 मई को प्रगतिशील भोजनमाता संगठन द्वारा अपने स्थाई रोजगार व न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर उत्तराखंड के हल्द्वानी (नैनीताल) के बुद्ध पार्

आलेख

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

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उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।