16 जनवरी : जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन

Published
Sun, 02/01/2026 - 07:00
/16-january-district-quarter-par-protest

मऊ में 16 जनवरी को राष्ट्रीय संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर बिजली बिल 2025, मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं, वी बी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण), नये बीज विधेयक को वापस लेने व कर्ज माफ, एमएसपी की गारंटी का कानून बनाने व 60 साल से अधिक आयु वाले महिला-पुरुष मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा गारंटी के तहत 10,000 रुपए मासिक गुजारा भत्ता देने की मांग करते हुए मऊ कलेक्ट्रेट पर जनसभा व प्रदर्शन के पश्चात राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा गया।
    
इस अवसर पर सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार मनरेगा की जगह राम के नाम पर कानून लायी है। वह राम के नाम पर ग्रामीण मजदूरों को बेवकूफ बना रही है। पहले के रोजगार के अधिकार को इस कानून में सरकार की मर्जी में बदल दिया गया है। वक्ताओं ने कहा कि श्रम संहिताएं व वी बी राम जी कानून मजदूर विरोधी है। सरकार पूंजीपतियों का मुनाफा बढ़ाने की खातिर मजदूरों के शोषण को बढ़ाने का इंतजाम कर रही है।     
    
प्रदर्शन में इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, उत्तर प्रदेश किसान सभा (सी पी आई), उत्तर प्रदेश किसान सभा (सी पी आई एम), किसान महासभा, ए आई के एफ, ए आई के के एम एस व क्रांतिकारी जन मुक्ति संगठन ने हिस्सेदारी की।
    
इसी तरह बलिया, जिला मुख्यालय पर भी जनसभा व धरना-प्रदर्शन के पश्चात राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा गया। 
    
सभा में वक्ताओं ने कहा कि नये बिजली बिल व बीज विधेयक के जरिये सरकार किसान आंदोलन के दौरान किये गये समझौते को पलट रही है। अब बिजली की कीमतें बढ़ाकर व बीज कंपनियों को मनमाने दामों में बीच बेचने की छूट से किसानों पर बोझ बढ़ेगा। इस पर सरकार न तो खुद फसलों की खरीद बढ़ा रही है और न ही समर्थन मूल्य बढ़ा रही है। सरकार गरीब-मझोले किसानों को तबाह-बर्बाद करना चाहती है ताकि बड़ी पूंजी खेती अपने हाथ में ले सके। 
    
प्रदर्शन में इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, उत्तर प्रदेश किसान सभा (सी पी आई), उत्तर प्रदेश किसान सभा (सी पी आई एम), किसान महासभा, क्रांतिकारी किसान यूनियन और किसान फ्रन्ट ने हिस्सेदारी की। 
            -मऊ संवाददाता

आलेख

/capitalism-naitikataa-aur-paakhand

जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं। 

/baukhalaye-president-trump-ke-state-of-union-speech-kaa-saar

ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा। 

/ameriki-iimperialism-ka-trade-war-cause-&-ressult

लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?

/iran-par-mandarate-yuddha-ke-badal

इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं

/prashant-bhushan-ka-afsos-and-left-liberal-ka-political-divaliyapan

गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि