जेन जी के बाद जेन अल्फा

Published
Sun, 08/16/2026 - 15:50
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पिछले दिनों जंतर मंतर पर जेन जी का विरोध प्रदर्शन हुआ। जेन जी की मांग पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की थी। शुरूआत में तो मोदी सरकार और लगुये भगुवे उसी तरह व्यवहार कर रहे थे जैसे उन्होंने किसान आंदोलन में किया। मोदी सरकार के मंत्री-सांसद इस आंदोलन को गरियाने में जुटे रहे। लेकिन जेन जी के इस प्रदर्शन ने मोदी सरकार को मजबूर किया कि वह धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा दिलवाये। अंततः जेन जी अपनी मांग मनवाने में कामयाब हुए। 
    
जेन जी का आंदोलन अभी खत्म ही हुआ था कि जेन अल्फा के आंदोलन शुरू हो गये। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि कई राज्यों में स्कूलों में पढ़ने वाले जेन अल्फा छात्रों ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं जैसे- टाॅयलेट, शिक्षकों की कमी, पंखों की कमी, जीर्ण शीर्ण इमारतों आदि को लेकर प्रदर्शन किये। 
    
अभी हाल ही में 11 अगस्त को उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में करीब 300 जेन अल्फा छात्र अपने गांव से स्कूल तक की 5 किमी. लम्बी सड़क के निर्माण की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट आफिस पहुंचे जहां मौजूद पुलिस ने इन बच्चों को धमकाने का काम किया। इन बच्चों का कहना है कि वे रोड की वजह से स्कूल नहीं जा पाते। एक दिन की बारिश उन्हें कई दिन तक स्कूल जाने से रोक देती है।
    
जेन अल्फा छात्रों के आंदोलन एक तरफ शिक्षा के क्षेत्र में सरकारों की घोर उदासीनता को सामने लाते हैं वहीं ये आंदोलन दिखाते हैं कि नई पीढ़ी भी अब संघर्ष के मैदान में उतरने लगी है।
    
1991 से देश में लागू निजीकरण- उदारीकरण की नीतियों ने शिक्षा व्यवस्था को वहां ला खड़ा किया है जहां सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। स्कूलों तक आने-जाने में छात्रों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कहीं पहाड़ों में जंगली जानवरों से बचते हुए तो कहीं नदी के पानी में तैरकर अपनी जान पर खेलते हुए छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जा पाते हैं। ऊपर से सरकार ने नई शिक्षा नीति के तहत हजारों स्कूलों को विलय के नाम पर बंद कर दिया है और उनके स्कूलों की दूरी बढ़ा दी है।
    
ऐसे में स्वाभाविक है कि ये जेन अल्फा छात्र अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरे। उन्होंने पूरी बहादुरी के साथ उस पुलिस का भी सामना किया जो उन्हें धमकाने का काम कर रही थी। काफी जद्दोजहद के बाद प्रशासन ने उनकी मांगों को मानने के आश्वासन भी दिये। 
    
जेन जी के छात्रों ने तो मोदी को सकते में डाला ही लेकिन जेन अल्फा के इन आंदोलनों की धमक भी कम नहीं थी। यहां तक कि आर एस एस के मुखिया मोहन भागवत ने भी उनके आंदोलनों को संज्ञान में लेते हुए अपने भाषण में जेन अल्फा का जिक्र किया। 
    
आर एस एस और भाजपा लगातार शिक्षा का निजीकरण कर उसे मुनाफे की वस्तु में बदल रहे हैं साथ ही वे शिक्षा का भगवाकरण कर रहे हैं। ऐसा करके वे एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना चाहते हैं जो उनके इशारे पर नाचे। लेकिन जेन जी और जेन अल्फा के आंदोलन उनके इन अरमानों पर पानी फेरने का काम करते लगते हैं। इसने मोदी और भागवत दोनों को ही परेशानी में डाला है। मोदी रील बनाकर छात्रों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं तो भागवत छात्रों को आंदोलन किस तरह किये जायें इसकी सलाह दे रहे हैं।     
            -एक पाठक

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