ममदानी, राहुल और चुनावी मुद्दे
न्यूयार्क शहर के मेयर के चुनाव में जोहरान ममदानी की जीत ने वाम उदारवादियों को खुशी से पागल कर दिया है। सरकारी वामपंथी भी पर्याप्त खुश हैं। उनकी खुशी किसी हद तक जायज भी है
न्यूयार्क शहर के मेयर के चुनाव में जोहरान ममदानी की जीत ने वाम उदारवादियों को खुशी से पागल कर दिया है। सरकारी वामपंथी भी पर्याप्त खुश हैं। उनकी खुशी किसी हद तक जायज भी है
तंजानिया अफ्रीकी महाद्वीप का एक देश है। 29 अक्टूबर 2025 को यहां राष्ट्रपति पद का चुनाव हुआ। चुनाव पूर्व ही सत्ताधारी पार्टी ने विपक्षी दलों के नेताओं को जेल में डालने के
इजरायल द्वारा गाजा का नरसंहार शुरू किये दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस पूरी अवधि में गाजा के समर्थन में दुनिया भर में जनता की एकजुटता बढ़ती गयी है। 2 वर्ष पूरे होने पर भी जग
डोनाल्ड ट्रम्प जब से दुबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने तब से वे ऐसे-ऐसे कारनामे कर रहे हैं कि अनायास ही वे महान स्पेनिश लेखक मिगुएल डे सर्वेंट्स के उपन्यास ‘डॉन क्विगजोट’
नेपाल के जेन-जेड युवाओं की दिखायी राह पर मेडागास्कर के युवा बढ़ चुके हैं। सितम्बर माह में बिजली व पानी की कटौती के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन का सरकार द्वारा दमन किया ग
बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में ऑटिज्म पर आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में अपना घोर विज्ञान विरोधी वक्तव्य दिया। ऑटिज्म पैदाइशी एक ऐसी अवस्था
पूंजीवादी लोकतंत्र का लुटेरा चेहरा अधिकाधिक उजागर होता जा रहा है। ऐसे में कल यही जनता जब सुस्पष्ट क्रांतिकारी विचारधारा से लैस होकर सड़कों पर उतरेगी तो उसके निशाने पर पूंजीवादी व्यवस्था होगी। तब इस लुटेरी व्यवस्था के साथ पीछे से सक्रिय लुटेरी ताकतों का षड्यंत्र भी ध्वस्त हो जायेगा। और समाजवाद के नये सवेरे का उदय होगा। भारत के सभी पड़ोसी मुल्कों के युवा-आम मेहनतकश अपनी पहलकदमी दिखा चुके हैं। अगला नम्बर निश्चय ही भारत का होगा।
अभी 31 अगस्त और 1 सितम्बर के चीन के शहर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एस.सी.ओ.) का अब तक का सबसे बड़ा शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। शंघाई सहयोग संगठन की शुरूवात एक छोटे से क्
फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों रूस-यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन की मदद करने के चक्कर में फ्रांसीसी मजदूर-मेहनतकश अवाम के ऊपर लगातार आर्थिक बोझ डालकर उनकी जिंदगी को और ज्यादा अ
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।