जाना सुमित सरकार का

Published
Tue, 09/01/2026 - 15:50
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13 अगस्त को प्रसिद्ध इतिहासकार सुमित सरकार का 87 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया। भारत के इतिहास खासकर आधुनिक इतिहास में रुचि रखने वाले शायद ही किसी व्यक्ति ने सुमित सरकार की सबसे लोकप्रिय किताब ‘‘आधुनिक भारत (Modern India 1885-1947) न पढ़ी हो। वह इस विषय में लिखी गयी सबसे महत्वपूर्ण व अच्छी किताब में से एक है। सुमित सरकार को उनकी अनेकों पुस्तकों, लेखों व भाषणों के लिए याद किया जा रहा है परन्तु उनको याद करने की सबसे बड़ी वजह तो उनकी लिखी पुस्तक ‘‘आधुनिक भारत’’ ही है। 
    
सुमित सरकार ने वर्षों तक दिल्ली विश्वविद्यालय में अध्ययन किया। उनकी जन्मतिथि का ठीक-ठीक पता नहीं है। उनके पिता सुशोभन सरकार भी इतिहासकार थे। और उनके मामा प्रसिद्ध सांख्यविज्ञ प्रशांत चन्द्र महालनोबिस थे। यानी उनका जन्म बंगाल के एक ऐसे परिवार में हुआ जहां कई विद्वान थे। इसका असर उन पर होना ही था। परन्तु यह असर सकारात्मक था। इसकी झलक न केवल पेशेवराना ढंग से इतिहास लिखने बल्कि इतिहास में शोषित-उत्पीड़ितों के संघर्षों को अच्छे ढंग से पेश करने में भी दिखायी देती है। उनकी पुस्तक ‘‘आधुनिक भारत’’ में आजादी की लड़ाई में मजदूरों, किसानों, युवाओं, आदिवासियों की भूमिका को अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
    
‘‘आधुनिक भारत’’ के अलावा सुमित सरकार को ‘द स्वदेशी मूवमेंट इन बंगाल (1903-1908)’: ‘राइटिंग सोशल हिस्ट्री’ व ‘माडर्न टाइम्स (1880-1950)’ के लिए भी याद किया जा सकता है। उन्हें सबाल्टर्न इतिहासकार के रूप में और बाद में उसमें उभरती हिन्दू फासीवादी प्रवृत्ति के कारण उससे अपने को अलग करने के लिए भी याद किया जा सकता है। 
    
इस सबके अलावा सुमित सरकार को इसलिए भी याद किया जाना चाहिए कि उन्होंने उस पुरूस्कार को माकपा के नेतृत्व वाली सरकार को जो उन्हें ‘राइटिंग सोशल हिस्ट्री’ के लिए 2004 में मिला था, लौटा दिया। सुमित सरकार ने यह पुरूस्कार तब लौटा दिया था जब 2007 में माकपा सरकार ने नंदीग्राम में किसानों को उनकी जमीन से बेदखल करने के लिए भारी दमन का सहारा लिया था। इसमें कई किसान मारे गये थे और कई दर्जन लोग घायल हुए थे। सुमित सरकार ने इस घटना की तुलना जलियांवाला बाग हत्याकांड से की थी। बाद में माकपा की सरकार का पतन हो गया था। सुमित सरकार ने पुरूस्कार लौटाकर ठीक वैसा कदम उठाया जैसे किसी इतिहासकार या विद्वान को उठाना चाहिए। 
    
हर इंसान को एक दिन दुनिया से जाना ही होता है। किसी के मरने से कोई फर्क नहीं पड़ता और किसी के जाने के बाद उसके कार्यों, भूमिका को याद करने लगते हैं। सुमित सरकार दूसरी श्रेणी के लोगों में हैं। 

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