तो फिर वे लोग कौन हैं? -गुलज़ार हुसैन

सुबह होते ही 
खुरपी और कुदाल लेकर खेतिहर 
खेतों पर काम करने चले जाते हैं 
हथौड़े लेकर मजदूर निर्माण कार्य में लग जाते हैं 
केतली लेकर चायवाला पानी गर्म करने लगता है 
तो फिर वे लोग कौन हैं 
जो लोहे की राड लेकर मेहनतकशों की पीठ की खाल उधेड़ने के लिए घर से निकलते हैं? 
        साभार : hindwi.org

आलेख

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जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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