वेतन भुगतान को संघर्षरत उपनल कर्मचारी
हल्द्वानी/ उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में पूरे पदों पर भर्तियां करने की जगह उसके विकल्प में आउअसोर्सिंग भर्तियां की जा रही हैं। स
हल्द्वानी/ उत्तराखण्ड सरकार द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में पूरे पदों पर भर्तियां करने की जगह उसके विकल्प में आउअसोर्सिंग भर्तियां की जा रही हैं। स
9 अगस्त, 1925 के दिन लखनऊ के निकट काकोरी में क्रांतिकारियों ने सरकारी खजाना लूट लिया था। इतिहास में यह घटना काकोरी ट्रेन एक्शन के नाम से प्रसिद्ध है जिसने कि अंग्रेजों की
उधमसिंह हमारे देश के अविस्मरणीय क्रांतिकारी थे जिन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के लिये सीधे तौर पर जिम्मेदार पंजाब के तत्कालीन गवर्नर जनरल ओ’डवायर को लंदन के एक सभागार
8 अगस्त को मोगा में पंजाब के दर्जनों जनवादी जनसंगठनों द्वारा आदिवासियों और उनके हितों के लिए संघर्षरत ताकतों के क्रूर कत्लेआम के खिलाफ रोषपूर्ण रैली और प्रदर्शन करके मांग
गुड़गांव/ पिछले 15-20 दिनों से गुरुग्राम में हरियाणा पुलिस द्वारा सरेआम किसी भी बांग्लाभाषी लोगों को (जिनमें अधिकांश मुस्लिम समुदाय से हैं) बिना किसी आरोप के पकड़ा जा रहा है, धमकाया
कुरुक्षेत्र/ कुरुक्षेत्र में 23 जुलाई को राईं धर्मशाला (नजदीक छोटा रेलवे स्टेशन थानेसर) में मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा), जो कि देशभर के 14 क्रांतिक
दिल्ली/ दिल्ली विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि, छम्च् 2020 और गिरते जनवादी माहौल के खिलाफ छात्र संगठनों ने आर्ट्स फैकल्टी पर प्रदर्शन किया।
दिल्ली/ कौन कहता है भाजपा सरकार में पुलिस मुस्तैद नहीं है। दिल्ली में एक ‘खतरनाक साजिश’ का पर्दाफाश किया गया।
हल्द्वानी/ उत्तराखंड में कक्षा 1 से 12 तक सरकारी विद्यालयों को क्लस्टर/मर्जर करने से विद्यालयों के बन्द होने के विरोध में परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)
मेरठ/ मजदूर संघर्ष संगठन का स्थापना सम्मेलन मेरठ के मलियाना में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की शुरुआत क्रांतिकारी गीत के साथ हुई। इसके बाद सर्वसम्मत
जब शीर्ष ऐसा है तो नीचे कल्पना की जा सकती है। और आज पूंजीवादी प्रचारतंत्र के सारे स्व-प्रतिबंध के बावजूद अनुयाईयों के कुकर्मों की दास्तां बाहर आ जाती है। कभी-कभी कोई सेंगर जेल भी चला जाता है। पर ज्यादातर वैसे ही छुट्टे सांड की तरह घूमते रहते हैं।
ट्रम्प के इस स्टेट आफ यूनियन भाषण का कुछ डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने बहिष्कार किया। कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सदस्यों ने इसमें भाग नहीं लिया। लेकिन ट्रम्प करीब दो घण्टे के अपने भाषण में अपने बारे में शेखी बघारते रहे और तमाम गलतियों और कमियों के लिए विरोधी पार्टी के राष्ट्रपतियों को जिम्मेदार ठहराते रहे। इस भाषण को झूठ का पुलिंदा कहना ज्यादा सही होगा।
लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?लेकिन इस समझौते के दूसरे पहलू की चर्चा नहीं हो रही है। वह पहलू है अमेरिका या ज्यादा बेहतर कहें तो अमरीकी साम्राज्यवादियों का व्यवहार। आखिर अमरीकी साम्राज्यवादियों को व्यापार के मामले में इस तरह के व्यवहार पर क्यों उतरना पड़ रहा है? क्यों वे केवल भारत ही नहीं, दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के मामले में इस तरह की जोर जबर्दस्ती पर उतर रहे हैं?
इस तरह पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बना हुआ है। यह खतरा ईरान के लिए प्रत्यक्ष है और यह दूर की बात नहीं है। इस अमरीकी आक्रमणकारी युद्ध के क्षेत्रीय और वैश्विक आयाम हैं। क्षेत्रीय ताकतों के अपने-अपने आपसी अंतरविरोध हैं
गत 26 दिसम्बर को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि थी। सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण ने इस अवसर पर एक ट्वीट कि