युद्ध विरोधी नारों के साथ मनाया गया शहादत दिवस
इस बार भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू का शहादत दिवस युद्ध की गूंज के बीच साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया गया। 22 व 23 मार्च को विचार गोष्ठी, युद्ध विरोधी सभा, साम्र
इस बार भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू का शहादत दिवस युद्ध की गूंज के बीच साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाया गया। 22 व 23 मार्च को विचार गोष्ठी, युद्ध विरोधी सभा, साम्र
हल्द्वानी/ विभिन्न राजनीतिक-सामाजिक संगठनों ने सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय के माध्यम से उत्तराखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री को बनभूलपुरा की जनता के आवास की रक्ष
23 मार्च 2026 को जबकि भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू के शहादत दिवस पर लोग उन्हें याद कर रहे थे, उसी रात तड़के 3 बजे भाजपा सरकार द्वारा शाहजहांपुर में नगर निगम के पास 1972 में
11 साल से अधिक समय से हरियाणा राज्य में न्यूनतम वेतनमान पुनर्निधारित (रिवाइज) नहीं हुआ है। हर 5 साल में न्यूनतम वेतनमान रिवाइज करने का नियम है। महंगाई के सापेक्ष जरूरत की
इस बार 8 मार्च : अंतर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस के अवसर पर दिल्ली से लेकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड तक आयोजित कार्यक्रमों में युद्ध की गूंज रही। सभा-गोष्ठियों
हल्द्वानी/ 24 फरवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जयमाला बाघची की पीठ ने बनभूलपुरा प्रकरण में अंतरिम आदेश दिया। इस अंतरिम आद
बदायूं/ उत्तर प्रदेश की बदायूं तहसील के परिषदीय स्कूलों में मिड डे मील बनाने का ठेका एन जी ओ को दिए जाने के विरोध में और अन्य मांगों को लेकर प्रगतिशील रस
फरीदाबाद/ 20 फरवरी 2026 को फरीदाबाद जन संघर्ष समिति के बैनर तले कालका अग्निकांड में झुलसे व हताहत हुए मजदूरों के न्याय के लिए आवाज उठाई गई।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।
भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और
उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।